Sunday, 5 August 2012

सत्यमेव जयते के पर्दे पर दिखेंगी कीटों की मास्टरनी

नरेंद्र कुंडू
जींद।
कीटों के वैद्य के नाम से मशहूर निडाना व ललीतखेड़ा की महिलाएं अब सत्यमेव जयते के पर्दे पर नजर आएंगी। कीटों की इन मास्टरिनयों से रू-ब-रू होने के लिए शनिवार को दिल्ली से सत्यमेव जयते की टीम ललीतखेड़ा गांव के खेतों में चल रही महिला किसान पाठशाला पहुंची। इस दौरान टीम ने लगभग आधे घंटे तक ललीतखेड़ा व निडानी की महिलाओं से कीटनाशक रहित खेती पर सवाल-जवाब किए व उनके अनुभव को अपने कैमरे में कैद किया। दरअसल सत्यमेव जयते की ये टीम अपने 'असर' कार्यक्रम की शूटिंग के लिए यहाँ आई थी और इसी  कार्यक्रम के लिए महिलाओं के शाट लिए।
निडाना व ललीतखेड़ा की महिलाएं अब सत्यमेव जयते के पर्दे से दुनिया के सामने खेतों से पैदा किए गए अपने कीट ज्ञान को बांटेगी। इसकी कवरेज के लिए सत्यमेव जयते की एक टीम शनिवार को ललीतखेड़ा गांव में चल रही महिला किसान पाठशाला में पहुंची। टीम की रिपोर्टर रितू भारद्वाज ने लगातार आधे घंटे तक इन महिलाओं के बीच बैठकर कीटनाशक रहित खेती के इनके ज्ञान को परखा तथा कैमरामैन कपील सिंह ने इनके अनुभव को अपने कैमरे में कैद किया। टीम ने महिलाओं से बिना कीटनाशक के फसल से अधिक पैदावार लेने का फार्मूले पर काफी देर तक चर्चा की। महिलाओं ने भी बिना किसी झिझक के खुलकर टीम के सामने अपने विचार रखे। कीटों की मास्टर ट्रेनर सविता, मनीषा, मीना मलिक ने बताया कि उन्होंने 142 प्रकार के कीटों की पहचान कर ली है। जिसमें 43 किस्म के कीट शाकाहारी व 99 किस्म के कीट मासाहारी होते हैं। शाकाहारी कीट फसल में रस चूसकर व पत्ते खाकर अपनी वंशवृद्धि करते हैं, लेकिन मासाहारी कीट शाकाहारी कीटों को खाकर अपना गुजारा करते हैं। इस प्रकार मासहारी कीट शाकाहारी कीटों को चट कर देते हैं। कीटों के जीवनचक्र के दौरान किसान को कीटनाशक का प्रयोग करने की जरुरत नहीं पड़ती। आज किसान को अगर जरुरत है तो वह है कीटों का ज्ञान अर्जित करने की। कीट मित्र किसान रणबीर मलिक ने टीम द्वारा पुछे गए बिना कीटनाशक का प्रयोग किए अच्छी पैदावार लेने के सवाल का जवाब देते हुए मलिक ने बताया कि अच्छी पैदावार के लिए दो चीजों की जरुरत होती है। पहली तो सिंचाई के लिए अच्छे पानी व दूसरी खेत में पौधों की पर्याप्त संख्या। खेत में अगर पौधों की पर्याप्त संख्या होगी तो अधिक पैदावार अपने आप ही मिल जाएगी। किसान रामदेवा ने टीम के सामने कीटनाशक का प्रयोग न करने वाले एक किसान का ताजा उदहाराण रखते हुए बताया कि उनके पड़ोसी किसान कृष्ण की गन्ने की फसल में काली कीड़ी का काफी ज्यादा प्रकोप हो गया था, लेकिन कृष्ण ने एक बार भी अपनी फसल में कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया। कुछ दिन बाद काली कीड़ी को मासाहारी कीटों ने चट कर उसका खात्मा कर दिया और आज कृष्ण की गन्ने की फसल सुरक्षित है। इस प्रकार किसान का कीटनाशक पर खर्च होने वाला पैसा भी बच गया और उसकी फसल जहर से भी बच गई। इस दौरान टीम ने महिलाओं द्वारा कीटों पर लिखे गए गीतों की रिकार्डिंग भी की। बाद में महिलाओं ने टीम को हथजोड़ा कीट का चित्र स्मृति चिह्न के रूप में भेंट किया।
महिलाओं की कायल हो गई टीम की रिपोर्टरटीम की रिपोर्टर रितू भारद्वाज कार्यक्रम की रिकार्रिंड़ग के दौरान महिलाओं से सवाल-जवाब करते समय उनके अनुभव को देखकर उनकी कायल हो गई। रितू ने इन महिलाओं से प्रेरणा लेकर इस अभियान की जमीनी हकीकत से रू-ब-रू होने के लिए महिलाओं से दौबारा अपने पिता के साथ उनकी पाठशाला में आने का वायदा किया।

पाठशाला में महिलाओं को कैमरे में शूट करते टीम के सदस्य।
 टीम की रिपोर्टर को स्मृति चिह् भेंट करती महिलाएं।





1 comment:

  1. sir aapk blog hume aage badhne ki prerna de raha he. aap isi treh likhte raho..

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