Tuesday, 23 October 2012

खेल-खेल में बन गया कीटों का मास्टर

6 वर्षीय निखिल को 100 से भी ज्यादा कीटों के नाम कंठस्थ

कीट को देखते ही उसके जीवनचक्र को पकड़ लेती हैं निखिल की पारखी नजरें

नरेंद्र कुंडू
जींद। कहते हैं कि प्रतिभा किसी परिचय की मोहताज नहीं होती है, लेकिन निडानी के मिनी साइंटिस्ट 6 वर्षीय निखिल ने अपनी प्रतिभा व विलक्षण बुद्धि से इस कहावत को उलट दिया है। 6 वर्षीय निखिल ने छोटी सी उम्र में जो उपलब्धि हासिल की है, उससे साबित हो गया है कि प्रतिभा उम्र की मोहताज नहीं होती है। जिले के निडाना गांव निवासी रणबीर मलिक का पुत्र निखिल छोटी सी उम्र में बड़े-बड़े कृषि वैज्ञानिकों की समझ व ज्ञान पर भारी पड़ता है। जिस उम्र में बच्चे ठीक से अपने परिवार के सदस्यों के नाम भी याद नहीं रख पाते, उस उम्र में निखिल मलिक को 100 से भी ज्यादा कीटों के नाम जुबानी याद हैं।

कक्षा प्रथम तो नॉलेज पी.एच.डी. के स्तर की

रणबीर मलिक का 6 वर्षीय पुत्र निखिल मलिक फिलहाल गांव के ही स्कूल में प्रथम कक्षा की पढ़ाई कर रहा है। निखिल ए, बी, सी, डी के साथ खेती-किसानी के गुर भी सीख रहा है। निखिल को कपास की फसल में आने वाले सभी मांसाहारी व शाकाहारी कीटों की पहचान है तथा उसे यहां तक भी मालूम है कि अब फसल पर ये कीट क्या प्रभाव छोडे़गे? ताज्जुब की बात तो यह है कि खेती के इस कारोबार में जहां बड़े-बड़े किसान व कृषि विशेषज्ञ तक कीटों की पहचान में धोखा खा जाते हैं, उन कीटों को निखिल की पारखी नजरें पलक झपकते ही पहचान लेती हैं। निखिल कीट को देखते ही उसके पैदा होने से लेकर उसकी सातों पीढिय़ों तक की पौथियां किसानों के सामने खोल कर रख देता। निखिल अपने पिता रणबीर मलिक की तरह ही किसानों को कीटों की पढ़ाई करवाने के साथ-साथ कीटनाशक रहित खेती के लिए भी प्रेरित कर रहा है। इस प्रकार रणबीर मलिक का पुत्र निखिल मलिक छोटी सी उम्र में ही नन्हा धरतीपुत्र बनने जा रहा है।

यूं शुरू हुई निखिल की कीटों की पढ़ाई

2010 में कृषि विभाग की तरफ से उनके खेत में महिला किसान पाठशाला की शुरूआत की गई थी। यह पाठशाला 18 सप्ताह तक चली थी। उस समय निखिल की उम्र सिर्फ चार वर्ष की थी। निखिल अपनी मां अनीता मलिक के साथ इस महिला किसान पाठशाला में जाता था। इस पाठशाला में महिलाओं के बीच बैठकर इनकी बातें सुनने और पाठशाला में महिलाओं द्वारा किए जाने वाले प्रयोगों को देखकर निखिल के दिमाक में भी कीटों  ने घर कर लिया। बस फिर क्या था यहीं से हो गया निखिल की कीटों की पढ़ाई का सिलसिला शुरू। इस पाठशाला में कीटों के प्रति उसका रुझान इतना बढ़ गया कि वह कीटों की पहचान करने के साथ उन सभी के नाम व काम भी कंठस्थ कर गया। इस प्रकार मात्र 18 सप्ताह में पांच वर्षीय निखिल ने कीट मास्टर की डिग्री हासिल कर ली।

कीटों का ज्ञान इतना की साइंटिस्ट भी शर्मा जाएं

निखिल मलिक को वैसे तो कपास की फसल में आने वाले 100 से भी ज्यादा कीटों के नाम व उनके क्रियाकलापों के बारे में जानकारी हैं। लेकिन इनमें से 60 से भी ज्यादा ऐसे मासाहारी व शाकाहारी कीट हैं, जिनके पूरे जीवनचक्र के बारे में निखिल को जानकारी है कि किस कीट के अंडों में से कितने दिन में बच्चे निकलते हैं, कितने दिन में बच्चे प्रौढ़ होते हैं, कितने दिनों में प्रौढ़ से पतंगा बनता है और ये क्या-क्या खाते हैं। निखिल के दिमाग में इन कीटों के पूरे जीवनकाल की तस्वीर बिल्कुल सही ढंग से छप चुकी है। निखिल कपास की फसल को देखकर यह भी बता देता है कि अब कपास में कौन सा कीड़ा आया हुआ है और अब आगे यह क्या करेगा? कौन सा कीट किस किस कीट को खाएगा? या कौन सा कीड़ा दूसरे कीडे़ के पेट के अंदर अपने बच्चे पलवाएगा? और इन सबका कपास की फसल पर क्या प्रभाव पड़ेगा। निखिल को इस समय लगभग 100 मांसाहारी व शाकाहारी कीटों की पहचान है, जिनमें मुख्य रूप से हरा तेला, सफेद मक्खी, मिलीबग, चूरड़ा, हथजोड़ा, मकड़ी, ड्रेगल फ्लाई हैलीकाप्टर, फेल मक्खी, अंगीरा, फंगीरा, जंगीरा, ततैया, अंजनहारी, भंभीरी, खातन, कुम्हारन, तेलन, लेडी बिटल, क्राइसोपा आदि शामिल हैं।

पिता भी लगे हैं कीटों के शिक्षण में 

निडाना गांव निवासी निखिल मलिक के पिता रणबीर मलिक एक साधारण किसान हैं और वह खेतीबाड़ी के सहारे ही अपने परिवार का गुजर-बसर करता है। रणबीर कीट मित्र किसान है और यह पिछले चार सालों से निडाना गांव में चल रही किसान खेत पाठशाला से जुड़ा हुआ है। इस पाठशाला में किसानों को खेत में बैठाकर कीटों की पहचान करवाने के साथ-साथ कीटनाशक रहित खेती के लिए प्रेरित किया जाता हैं। फिलहाल रणबीर मलिक इस पाठशाला में मास्टर ट्रेनर के रूप में कार्य कर रहा है और अपने खर्च पर ही आस-पास के किसानों को कीटनाशक रहित खेती के गुर सीखाकर उनकी थाली को जहरमुक्त करने के प्रयास में जुटे हुए हैं। इसके अलावा रणबीर मलिक कृषि पर ब्लॉग भी लिखते हैं और उनके ब्लॉग इंटरनेट पर देश ही नहीं विदेश में भी लोग देखते हैं। निखिल की मम्मी अनीता भी महिला खेत पाठशाला की सक्रिय सदस्य हैं और महिला खेत पाठशाला में महिलाओं को जोडऩे में अहम योगदान कर रही हैं।

दादी को प्रतिदिन दिखाता है कीटों की गतिविधियां

निखिल ने 2010 में महिला किसान पाठशाला में कीटों की पढ़ाई पूरी करने के बाद 2011 में गांव में खाली पड़े अपने प्लाट में कपास की फसल की बिजाई करवाई थी। इस फसल की देखरेख निखिल प्रतिदिन स्वयं करता था और अपनी दादी चंद्रपति को भी कपास की फसल पर होने वाली गतिविधि के बारे में बताता है। निखिल की इन गतिविधियों को देखकर उसकी दादी चंद्रपति को भी कुछ कीटों की पहचान हो गई है। निखिल की इस छोटी उम्र में बड़ी जानकारी से उसकी दादी भी काफी खुश हैं।
कपास की फसल में कीटों का अवलोकन करता निखिल।

लैपटॉप पर अपनी दादी को कीटों की जानकारी देता निखिल।

लैपटॉप पर भी करवाता है कीटों की पहचान

रणबीर मलिक ने बताया कि उनके घर पर एक लैपटॉप है। शुरू-शुरू में तो वह निखिल को लैपटॉप नहीं चलाने देता था, क्योंकि उसे डर रहता था कि कहीं निखिल इसे खराब न कर दे। लेकिन निखिल चोरी-छिपे लैपटॉप को चला लेता था और इस प्रकार धीरे-धीरे निखिल को लैपटॉप की जानकारी भी हो गई। मलिक ने बताया कि अब निखिल घर में आने वाले मेहमानों, आस-पास की महिलाओं व किसानों को लैपटॉप में डाली गई कीटों की फोटो दिखाकर उनकी पहचान करवाता है।


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