Monday, 27 May 2013

अब किसानों को कीट साक्षरता का पाठ पढ़ाएंगी खापें

कीटनाशक रहित खेती के लिए किसानों को प्रेरित करने के लिए शुरू करेंगी अभियान

नरेंद्र कुंडू
जींद। भले ही आज कीट साक्षरता के अग्रदूत डा. सुरेंद्र दलाल हमारे बीच नहीं रहे हों लेकिन डा. दलाल द्वारा जिले में शुरू की गई जहरमुक्त खेती के मिशन को आगे बढ़ाने के लिए रविवार को हरियाणा की खाप पंचायतों ने एक बड़ा ऐलान कर दिया है। रविवार को डा. दलाल की शोक सभा में पहुंचे प्रदेशभर की बड़ी-बड़ी खापों के प्रतिनिधियों ने जहरमुक्त खेती की इस मुहिम को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर ली है। इस तरह की सामाजिक मुहिम में खाप चौधरियों की आहुति से एक बार फिर से खाप पंचायतों का एक नया चेहरा समाज के सामने आया है। इससे पहले खाप पंचायतें कन्या भ्रूण हत्या जैसी सामाजिक कुरीति को मिटाने के लिए अभियान चलाने का संकल्प भी ले चुकी हैं। 
काबिलेगौर है कि थाली को जहरमुक्त करने की मुहिम में जुटे कीटों के मित्र डा. सुरेंद्र दलाल पिछले 3 महीने तक संघन कौमा में रहने के बाद गत 18 मई को दुनिया से विदा हो गए थे। 19 मई को उनके पैतृक गांव नंदगढ़ में उनका अंतिम संस्कार किया गया था। रविवार को जींद के पटवार भवन में डा. दलाल को श्रद्धांजलि देने के लिए एक शोक सभा का आयोजन किया गया था। डॉ. दलाल को श्रद्धाजंलि देने के लिए प्रदेशभर की 100 से अधिक  बड़ी-बड़ी खापों के प्रतिनिधि यहां पहुंचे थे। शोक सभा में डा. दलाल को श्रद्धांजलि अपॢत करते हुए पालम नई दिल्ली खाप के प्रधान रामकरण ङ्क्षसह सोलंकी ने कहा कि कीटनाशक रहित खेती की जो मुहिम डा. दलाल ने निडाना गांव के खेतों से शुरू की थी उसको आगे बढ़ाना अब खाप पंचायतों की जिम्मेदारी है। क्योंकि पिछले लगभग 4 दशकों से कीटों तथा किसानों के बीच चली आ रही इस जंग को समाप्त करवाने के लिए यह मामला 26 जून 2012 को खाप पंचायत की अदालत में आ चुका है और खाप प्रतिनिधियों ने इस विवाद के समझौते के लिए इसे स्वीकार भी किया है। समझौते के प्रयास को लेकर मामले की तहत तक जाने के लिए खुद उनकी खापों के प्रतिनिधियों ने निडाना के खतों में आकर इस विवाद की गहराई से जांच की थी। बराह बाहरा के प्रधान कुलदीप सिंह ढांडा ने कहा कि उन्होंने डा. दलाल को कीटों पर शोध करते हुए बड़ी बारीकी से देखा था। उन्होंने बताया कि डॉ. दलाल ने अपने घर में कीटों की रक्षा के लिए प्रयोगशाला बना रखी थी। ढांडा ने कहा कि दलाल को सही मायने में खापें तभी श्रद्धाजंलि दें सकेगी, जब उनके मिशन को खापें आगे बढ़ाएंगी। इसके बाद कंडेला खाप के प्रधान टेकराम कंडेला, ढुल के खाप इंद्र सिंह ढुल, बिनैन खाप के प्रवक्ता सूबेसिंह नैन, नंदगढ़ बारहा के होशियार सिंह दलाल, सांगवान खाप के कटार सिंह सांगवान, मान खाप के ओमप्रकाश मान, सतरोल खाप के  सूबेदार इंद्र सिंह समेत अनेक खापों के प्रधानों व प्रतिनिधियों के बीच इस बात पर सहमति बनी कि डॉ. दलाल के मिशन को आगेे बढ़ाने की जिम्मेदारी खापें अपने ऊपर लें। मिशन की जिम्मेदारी खापें अपने ऊपर किस तरह से लेगी। इसका प्रस्ताव शोकसभा शुरू होने के करीब 3 घंटे बाद सर्वजाति सर्वखाप हरियाणा के प्रधान दादा नफेसिंह नैन लेकर आए। उन्होंने खाप प्रतिनिधियों को कहा कि आज भरी सभा में जो फैसला डॉ. सुरेंद्र दलाल को लेकर खापें करेंगी। उन पर खापों को खरा उतरना होगा। नैन की बातों पर सहमति जताते हुए पालम खाप नई दिल्ली के प्रधान रामकरण सिंह सोलंकी ने कहा कि दिल्ली प्रदेश में उनकी खाप सबसे बड़ी खाप है, और वे इस बात की जिम्मेदारी लेते हैं कि डॉ. सुरेंद्र के मिशन को आगे बढ़ाएगें। उन्होंने कहा कि डॉ. दलाल व्यक्ति नहीं विचार थे और विचार कभी भी मरते नहीं। उन्होंने कहा कि इन विचारों को ङ्क्षजदा रखने के लिए अब खापें अपना सहयोग देंगी। फरीदकोट पंजाब से आए खेती विरासत मिशन के अध्यक्ष उमेद दत्त ने कहा कि हरियाणा सरकार ने डा. दलाल के अमूल्य योगदान को देखते हुए कृषि विभाग में एक प्रयोगशाला बनानी चाहिए, जिसमें डा. दलाल द्वारा कीटों पर किए शोध के बारे में जानकारी दी जानी चाहिए। इंदिरा गांधी ओपन विश्वविद्यालय नई दिल्ली में शोध कर रहे छात्र धर्मबीर शर्मा ने बताया उनका गांव निडाना है और इसी गांव को डा. दलाल ने प्रयोगशाला बनाया हुआ था। इसलिए उनका डा. दलाल से कई बार कीटों के बारे में गहन विश्लेषण हुआ है। धर्मबीर ने बताया कि डॉ. दलाल उनके अप्रत्यक्ष रूप से गाइड बने रहे हैं। 

डा. दलाल के जीवन पर एक नजर

डा. सुरेंद्र दलाल का जन्म वर्ष 1960 में जींद जिले के गांव नंदगढ़ में किसान परिवार में हुआ। अपने बहन-भाइयों में सबसे बड़े सुरेंद्र के पिता सेवानिवृत्त सैनिक थे। 9वीं कक्षा तक गांव के ही स्कूल में पढ़ाई करने के बाद डा. दलाल हाई स्कूल की शिक्षा के लिए सोनीपत के हिंदू हाई स्कूल चले गए। चौधरी चरण कृषि विश्वविद्यालय हिसार से बी.एस.सी. आनर्स किया। इसके बाद पौध प्रजनन में एम.एस.सी. व पी.एच.डी. की। इसके बाद वर्ष 2007 से राजपुरा तथा 2008 में निडाना गांव में किसानों के साथ मिलकर फसलों में पाए जाने वाले मांसाहारी तथा शाकाहारी कीटों पर शोध किया। 
 शोक सभा में डा. दलाल की मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए विचार-विमर्श करते खाप प्रतिनिधि।


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