Tuesday, 19 August 2014

किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बना ईगराह का मनबीर रेढ़ू

पिछले 6 वर्षों से बिना कीटनाशक के कर रहा है खेती
पहले उत्पादन का 40 प्रतिशत हिस्सा हो जाता था कीटनाशकों पर खर्च 

नरेंद्र कुंडू
जींद। आज अधिक उत्पादन की चाह में किसान फसलों में अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं। फसलों में अधिक कीटनाशकों के प्रयोग के कारण खेती में खर्च लगातार बढ़ रहा है, वहीं हमारा खान-पान व वातावरण भी दूषित हो रहा है। अधिक उत्पादन के मोह में फंसे किसानों को कीटनाशकों के अलावा कोई अन्य विकल्प नजर नहीं आ रहा है लेकिन जींद जिले के ईगराह गांव के प्रगतिशील किसान मनबीर रेढ़ू ने कीट ज्ञान की पद्धति को अपनाकर खेती पर बढ़ते अपने खर्च को तो कम किया ही है साथ-साथ अपने परिवार को थाली में बढ़ रहे जहर से भी मुक्ति दिलवाई है। मनबीर रेढ़ू आज दूसरे किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बन चुका है। मनबीर की उपलब्धियों को देखते हुए जींद जिला प्रशासन के अलावा गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा भी मनबीर को सम्मानित किया जा चुका है।
मनबीर रेढ़ू को गुजरात सरकार के मंत्री।
मनबीर रेढ़ू का कहना है कि पहले वह अधिक उत्पादन की चाह में फसलों में अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग करता था। इससे हर वर्ष उसकी फसल की बिक्री का चौथा हिस्सा कीटनाशकों पर खर्च हो जाता था लेकिन वर्ष 2006 में उसने कृषि विभाग द्वारा गांव में लगी किसान खेत पाठशाला में हिस्सा लिया। इस पाठशाला से कीटनाशकों के प्रति उसकी मानसिकता में थोड़ा परिवर्तन जरूर हुआ लेकिन फसल में आने वाले कीटों के क्रियाकलापों के बारे में उसे पूरी जानकारी नहीं होने के कारण वह कीटनाशकों के प्रयोग को छोडऩे के लिए दिल से दृढ़ निश्चय नहीं ले पा रहा था। इसके बाद वर्ष 2007 में कृषि विभाग के एडीओ डॉ. सुरेंद्र दलाल से उसकी मुलाकात हुई। डॉ. सुरेंद्र दलाल ने उसकी समस्या का हल निकालते हुए उसे कीट ज्ञान लेने के लिए प्रेरित किया। वर्ष 2008 में डॉ. सुरेंद्र दलाल के नेतृत्व में कृषि विभाग की तरफ से निडाना गांव में शुरू की गई किसान खेत पाठशाला में मनबीर रेढ़ू ने हिस्सा लिया और यहां से उसे कीटों की पहचान करनी शुरू की। जैसे-जैसे कीटों के बारे में उसकी जानकारी बढ़ती गई, वैसे-वैसे कीटनाशकों के प्रति उसकी मानसिकता भी बदलती चली गई। इसके बाद उसने कीटनाशकों से तौबा कर ली और फिर कभी उसने फसल में एक छंटाक जहर का भी प्रयोग नहीं किया। उसने दूसरे किसानों को भी जागरूक करने के लिए किसान खेत पाठशालाओं में जाना शुरू कर दिया। किसान खेत पाठशालाओं में रेढ़ू अपने साथियों के साथ मिलकर दूसरे किसानों को भी कीटों के बारे में बारीकी से जानकारी देता। रेढ़ू की उपलब्ध्यिों को देखते हुए वर्ष 2010 में कृषि विभाग की तरफ से मनबीर रेढ़ू को ब्लॉक स्तर पर पुरस्कृत भी किया गया। इसके बाद वर्ष 2012 में भी जाट धर्मार्थ सभा द्वारा भी जिला स्तर पर मनबीर रेढ़ू व उसके साथियों को पुरस्कृत किया। वहीं सितंबर 2013 में गुजरात में वाइब्रेट गुजरात के नाम से आयोजित राष्ट्रस्तरीय कार्यक्रम में भी तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मनबीर रेढ़ू को प्रगतिशील
मनबीर रेढ़ू का फोटो। 
किसान के तौर पर सम्मानित किया जा चुका है। रेढ़ू का कहना है कि वह खेती में नई-नई तकनीकों में विश्वास रखता है और हर तरह की तकनीक को खेती में प्रयोग कर के देखता है लेकिन कीट ज्ञान हासिल करने के बाद वह आंदरूनी तौर पर संतुष्ट है। वर्ष 2008 के बाद से उसने अपने खेतों में एक छंटाक जहर का प्रयोग भी नहीं किया है। मनबीर का कहना है कि जब तक वह फसलों में कीटनाशकों का प्रयोग करता था तो हर वर्ष उसकी आमदनी का चौथा हिस्सा कीटनाशकों पर खर्च हो जाता था लेकिन जब से उसने कीटनाशकों का प्रयोग बंद किया है, उसका खेती पर होने वाला यह खर्च बिल्कुल कम हो गया है। वहीं कीटनाशकों का प्रयोग बंद करने के बाद उसकी थाली से भी जहर कम हो गया है। इससे स्वास्थ्य पर होने वाले उसके खर्च में भी काफी कमी आई है। इतना ही नहीं मनबीर रेढ़ू पशुपालन में भी काफी महारत हासिल कर चुका है।

गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हरियाणवी वेशभूषा में खड़ा मनबीर रेढ़ू।  



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