Thursday, 31 January 2019

बड़ा चेहरा होने के बावजूद जींद के लोगों ने रणदीप सिंह सुरजेवाला को नकारा

कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़ा कर गया उपचुनाव

जींद, 31 जनवरी (नरेंद्र कुंडू):- उपचुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार का कारण कहीं न कहीं कांग्रेस की एकजुटता पर सवाल खड़े कर गया। उपचुनाव में जितने भी उम्मीदवार थे, रणदीप सिंह सुरजेवाला का कद उन सबसे बड़ा था। इसके बावजूद उनका तीसरे नंबर पर आना यह साबित करता है कि विधायक होने के बावजूद दोबारा चुनाव लडऩे के कारण लोगों ने रणदीप सिंह सुरजेवाला को नकार दिया। सभी कांग्रेसी नेताओं के एक मंच पर आने के कारण भी कांग्रेस कार्यकर्ता ज्यादा उत्साह में आ गए थे और अपनी जीत पक्की मानकर चल रहे थे, यह भी हार का बड़ा कारण माना जा रहा है।

जिस समय रणदीप सिंह सुरजेवाला का नाम कांग्रेस ने जींद उपचुनाव में घोषित किया तो सभी तरफ यह बात थी कि इतने बड़े चेहरे को कांग्रेस ने चुनाव मैदान में उतारकर यह उपचुनाव जीतना सुनिश्चित कर लिया है। उसके बाद उनके नामांकन के समय सभी कांग्रेसी नेताओं का एक साथ आने से भी यह तय हो गया था कि अब कांग्रेस इस रण को जीत लेगी। रणदीप सिंह सुरजेवाला का बाकी नेताओं के मुकाबले राजनीतिक प्रोफाइल बड़ा है। इस कारण भी कांगे्रस कार्यकर्ता ज्यादा उत्साहित थे। अब चुनाव में हुई करारी हार के कारण यह बात साबित हो गई है कि कांग्रेस नेता केवल चेहरा दिखाने के लिए रणदीप सिंह सुरजेवाला के साथ खड़े थे। २०१४ के चुनाव में कांग्रेस के प्रमोद सहवाग को १५२६७ वोट मिले थे। हालांकि प्रमोद सहवाग के राजनीतिक प्रोफाइल के हिसाब से रणदीप सिंह सुरजेवाला का प्रोफाइल बहुत बड़ा है। इसके बावजूद रणदीप सिंह सुरजेवाला इस चुनाव में केवल २२७४२ वोट ही हासिल कर पाए। रणदीप सिंह सुरजेवाला के चुनाव में सभी दिग्गज कांग्रेसी नेताओं के जोर लगाने के बावजूद पिछले विधानसभा चुनाव की अपेक्षा इस चुनाव में ७४७५ वोट ही ज्यादा हासिल हुए। इससे साफ है कि जींद के लोगों ने रणदीप सिंह सुरजेवाला को सिरे से नकार दिया। उपचुनाव की १३ राउंडों में गिनती हुई। एक भी राउंड में रणदीप सिंह सुरजेवाला कहीं आगे नहीं निकले। उससे कहीं आगे भाजपा रही तो कहीं जननायक जनता पार्टी रही।

धवस्त हुआ इनेलो का किला 

लगतार दो बार विजयी रहने वाली इनेलो का किला उपचुनाव में इस बार धवस्त हो गया। १३०८५९ वोटों में से इनेलो के उमेद सिंह रेढू को मात्र ३४५४ वोट ही मिले। इससे साफ है कि जींद के लोगों ने इनेलो को पूरी तरह से नकार दिया है। २००९ तथा २०१४ में हुए जींद विधानसभा चुनाव में दोनों पर इनेलो के डॉ. हरिचंद मिढ़ा चुनाव में जीते हैं। अब तीसरी बार इनेलो में टूट के कारण इनेलो का जींद से वोटबैंक लगभग समाप्त हो गया।

जींद की जनता ने बाहरी प्रत्याशी को नकारा

जींद विधानसभा उपचुनाव में जींद की जनता ने भाजपा को दिए बहुमत से यह साफ कर दिया है कि जींद की जनता अब बाहरी उम्मीदवार को स्वीकार नहीं करेगी। जींद उपचुनाव में कांग्रेस से रणदीप सिंह सुरजेवाला जो जींद जिले के ही सुरजेवाला गांव से हैं लेकिन मौजूदा कैथल से विधायक होने के कारण जींद की जनता ने उन्हें बाहरी प्रत्याशी माना वहीं दिग्विजय चौटाला सिरसा जिले से हैं इसलिए दिग्विजय को भी जींद की जनता ने बाहरी प्रत्याशी माना। इसके चलते जींद की जनता ने इस बार भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा को स्थानीय होने के कारण जीत दिलवाई है। 

जींद के विकास के लिए सरकार के खाते में डाली सीट

जींद जिला राजनीति का गढ़ है और जींद का इतिहास रहा है कि यहां से ज्यादातर सत्तासीन पार्टी के विपक्ष का विधायक रहा है। लेकिन इस बार जींद की जनता ने जींद के विकास के लिए सरकार के प्रतिनिधि को विजयी बनाने का काम किया है ताकि सरकार के साथ मिलकर जींद का विकास करवाया जा सके। इस उपचुनाव में भाजपा सरकार ने प्रचार-प्रसार के दौरान भाजपा प्रत्याशी को जीताने के लिए जींद के विकास के बड़े-बड़े वायदे किए हैं। इसको लेकर भी इस बार जींद की जनता का मन बदला है। 

जात-पात का नारा देने वालों को सिखाया सबक

जींद उपचुनाव में लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के अध्यक्ष एवं कुरुक्षेत्र से सांसद राजकुमार सैनी ने एक विशेष समुदाय के खिलाफ ब्यानबाजी कर 35 बिरादरी के नाम पर वोट मांगे थे। सांसद राजकुमार सैनी जाट आरक्षण के बाद से ही एक विशेष समुदाय के खिलाफ ब्यानबाजी कर सुर्खिया बटोर रहे हैं। इसके चलते ही सांसद राजकुमार सैनी ने भाजपा से अलग अपनी पार्टी बनाई है और जींद उपचुनाव उनकी पार्टी का पहला चुनाव था और इस उपचुनाव मे लोसुपा की तरफ से विनोद आशरी प्रत्याशी था। लेकिन इस उपचुनाव में जींद की जनता ने लोसुपा के प्रत्याशी विनोद आशरी की जमानत जब्त करवा कर यह संदेश दे दिया है कि अब जींद की जनता जात-पात का जहर फैलाने वालों के बहकावे में आने वाली नहीं है।

सत्ता के सेमीफाइनल में भाजपा की पीच पर डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने मारा अर्द्धसतक

भाजपा के कृष्ण मिढ़ा ने जजपा के दिग्विजय चौटाला को हराया
जमानत भी नहीं बचा पाए लोसुपा के प्रत्याशी विनोद आशरी व इनेलो के प्रत्याशी उमेद सिंह रेढू
भाजपा को शहरों के अलावा गांवों से भी मिले वोट, जींद की जनता नेे बाहरी प्रत्याशियों को नकारा
सांसद राजकुमार सैनी नहीं बन सके पिछड़ों का चेहरा 

जींद, 31 जनवरी (नरेंद्र कुंडू):- जींद में पहली बार कमल खिला। भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण लाल मिड्ढा ने 50 हजार 566 वोट लेकर निकटतम प्रतिद्वंद्वी जनननायक जनता पार्टी के दिग्विजय सिंह चौटाला को 12 हजार 935 वोटों से हराया। जेजेपी उम्मीदवार को 37 हजार 631 वोटों के साथ दूसरे और कांग्रेस के हैवीवेट उम्मीदवार रणदीप सिंह सुरजेवाला को 22 हजार 740 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर संतोष करना पड़ा। भाजपा के बागी सांसद राजकुमार सैनी की पार्टी लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी के उम्मीदवार विनोद आशरी ने 13 हजार 582 वोट लेकर इनेलो के उमेद सिंह रेढ़ू को पांचवें स्थान पर धकेल दिया। उपचुनाव में कुल 21 उम्मीदवार थे जिनमें से पांच प्रत्याशी मतों का सैंकड़ा भी पार नहीं कर सके। 345 वोट लेकर नोटा (पसंद नहीं) 15 उम्मीदवारों से आगे रहा। पांच मुख्य सियासी दलों के अलावा केवल एसएनपी के उम्मीदवार राधेश्याम ही ऐसे प्रत्याशी हैं जो नोटा से ज्यादा वोट ले सके। हालांकि नोटा पर उनकी बढ़त भी केवल 15 मतों पर सिमट गई। हरियाणा की सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे जींद विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा ने भारी मतों से जीत हासिल की है। इस उपचुनाव में भाजपा को शहर के अलावा ग्रामीण क्षेत्र में भी काफी संख्या में वोट हासिल किए। 
जींद में तमाम राजनीतिक दलों के योद्धा अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे थे, लेकिन यहां के मतदाताओं ने भाजपा के मिढ़ा के पक्ष में अपना फरमान सुनाया। इनेलो के टिकट पर दो बार विधायक रह चुके डॉ. हरिचंद मिढ़ा के देहावसान के चलते जींद में उपचुनाव हुआ था। प्रदेश की राजनीतिक राजधानी माने जाने वाले जींद उपचुनाव के नतीजे सभी दलों के लिए आइना हैं। इन नतीजों से सबक लेकर राजनीतिक दलों को न केवल अपनी रणनीति में बदलाव करना पड़ सकता है, बल्कि लोकसभा चुनाव के लिए नई पैंतरेबाजी अपनानी पड़ सकती है। जींद को जाटलैंड माना जाता है। इसके बावजूद 1972 के बाद से यहां कभी जाट उम्मीदवार चुनाव नहीं जीत सका। यह भी हकीकत है कि इनेलो व कांग्रेस के गढ़ रह चुके जींद में भाजपा भी कभी कमल का फूल नहीं खिला सकी, लेकिन इस बार फूल खिल गया। जींद में इस बार 76 फीसदी मतदान हुआ। शहर के साथ-साथ ग्रामीण मतदाताओं खासकर महिलाओं ने भी इस बार मतदान में खासी रुचि दिखाई। जींद उपचुनाव के नतीजों न केवल मुख्यमंत्री मनोहर लाल की प्रतिष्ठा से जुड़े थे, बल्कि पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला की राजनीतिक विरासत का फैसला भी किया। कांग्रेस को इस बार सत्ता में वापसी की आस थी, इसलिए पार्टी ने अपने कद्दावर नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला पर दांव खेला। लेकिन,जींद की जनता ने कांग्रेस को नकार दिया। सुरजेवाला तीसरे स्थान पर रहे।

शाह ने दी जीत पर बधाई 

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने ट्वीट कर लिखा कि हरियाणा के जींद विधानसभा उपचुनाव में भाजपा की भव्य जीत मोदी की केंद्र सरकार और प्रदेश की मनोहर लाल खट्टर सरकार के विकास व लोक-कल्याणकारी कार्यों में जनता के विश्वास की जीत है। हरियाणा की जनता ने भ्रष्टाचार और जातिवाद को नकार कर पुन: भाजपा के विकासवाद पर अपनी मोहर लगाई है।

इनेलो ने कहा पैसे वालों के मुकाबले रहे कमजोर 

इनेलो के प्रदेश अध्यक्ष अशोक अरोड़ा ने जींद उपचुनाव में हार की जिम्मेदारी लेते हुए कहा कि उनका उम्मीदवार पैसे वालों के मुकाबले कमजोर रहा है। वह किसान का बेटा है और सरकार ने साम-दाम-दंड-भेद लगाया। हम पार्टी की हार को स्वीकार करते हैं और जीतने वाले भाजपा के उम्मीदवार डॉ. कृष्ण मिढ़ा को बधाई देते हैं। उन्होंने मशीनों पर किसी भी तरह की टिप्पणी करने से इन्कार कर दिया।

शर्मा ने कहा, मैंने हुड्डा को पहले ही कहा था उनका कांटा निकल गया

जींद उपचुनाव पर भाजपा के वरिष्ठ नेता और शिक्षा मंत्री रामविलास शर्मा का कहना है कि उन्होंने इस उपचुनाव के परिणाम नामांकन के समय ही बता दिए थे। उन्होंने याद दिलाया कि नामांकन के बाद जब उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा से यह कहा था कि उनका कांटा निकल गया तब ही यह स्पष्ट हो गया था कि कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी की मूंछ के बाल के रूप में काम कर रहे रणदीप सुरजेवाला तीसरे स्थान पर आएंगे। उन्होंने कहा कि अभय सिंह चौटाला ने जिस तरह दबाव बनाकर पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला और उनकी पत्नी स्नेहलता का बयान जारी करवाया उसी का परिणाम है कि उनके उम्मीदवार को इतने कम वोट मिल रहे हैं।

यूं हुआ था चुनाव

सोमवार को हुए चुनाव के दौरान जींद में कुल 174 बूथों पर मतदान हुआ। जींद की 1,72,774  मतदाताओं में से 1,30,913 मतदाताओं ने अपना वोट डाला। इस बार ग्रामीणों ने शहर के लोगों को पीछे छोड़ते हुए कुल 87 प्रतिशत मतदान किया, वहीं शहरों में 72 प्रतिशत मतदान हुआ। वोटिंग के दौरान बूथ नंबर 146 पर ईवीएम मशीन भी खराब हुई थी। दो जगह पर कार्यकर्ताओं में आपसी झड़प हुई थी। एक झड़प में कांग्रेस और लोसपा के कार्यकर्ता बताए गए थे।

आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा को मिलेगा फायदा

इस चुनाव में भाजपा एक मात्र ऐसी पार्टी थी, जिसने अपनी पूरी संगठनात्मक ताकत के साथ चुनाव लड़ा है। छोटे कार्यकर्ता से लेकर मंत्री और मुख्यमंत्री तक चुनाव में प्रचार के लिए उतरे। इस जीत का असर 2019 में होने वाले लोकसभा और विधानसभा चुनाव पर पड़ेगा। जीत से उत्साहित पार्टी लोकसभा चुनाव के साथ-साथ विधानसभा चुनाव कराने की ओर भी कदम बढ़ा सकती है। वहीं मोमेंटम को बरकरार रखने के लिए अपने गैर परंपरागत वोटर को साधने की कोशिश करेगी। इस कड़ी में सरकार घोषणाओं का पिटारा भी खोल सकती है।

कांग्रेस के लिए अंदरुनी गुटबाजी फिर बड़ी चुनौती

इस चुनाव में रणदीप सुरजेवाला जैसे उम्मीदवार को उतारने के बाद भी कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा। राजनीतिक के जानकार इसे कहीं न कहीं एक बार फिर अंदरुनी गुटबाजी से जोड़कर देख रहे हैं। पूरे चुनाव में कांग्रेस नेता दिखाने के लिए जरूर सुरजेवाला के साथ रहे, लेकिन चुनाव अकेले सुरजेवाला ने ही लड़ा। आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में यदि कांग्रेस को जीत हासिल करनी है तो इस अंदरूनी गुटबाजी को खत्म करना पड़ेगा। तभी वह हरियाणा में लोकसभा और विधानसभा सीटों पर कब्जा जमा सकती है। हाईकमान और हरियाणा प्रभारी के लिए यह बड़ी चुनौती होगा।

जजपा के गठन ने इनेलो को कर दिया कमजोर

जींद उपचुनाव में भले ही जननायक जनता पार्टी की हार हुई हो लेकिन गठन के चंद महीने बाद चुनाव लडऩा और 37631 वोट हासिल करना उनके लिए सबसे बड़ा प्लस प्वाइंट है। जजपा के गठन ने इनेलो को कमजोर कर दिया है। जाटलैंड में दूसरी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी जजपा कहीं न कहीं इनेलो का विकल्प बनकर उभरी है। जजपा इस हार को भी अपनी जीत की तरह लेगी और आगामी लोकसभा और विधानसभा चुनाव में ज्यादा दमखम के साथ उतरेगी। 

इनेलो के लिए जजपा बड़ी चुनौती

2014 में जींद का विधायक देने वाली इनेलो उपचुनाव में पांचवें नंबर पर पहुंच गई। इनेलो के वोट बैंक में सबसे ज्यादा सेंधमारी जजपा ने की। भविष्य में इनेलो के लिए सबसे बड़ी चुनौती जजपा है। इस साल में लोकसभा और विधानसभा चुनाव होने हैं। ऐसे में यह देखना मुख्य रहेगा कि इनेलो अपने परंपरागत वोट बैंक को रोके रखने के लिए जजपा के खिलाफ क्या रणनीति बनाती है। यदि इनेलो इस सेंधमारी को नहीं रोक सकी तो यह आगामी चुनाव में उसके लिए बेहद नुकसानदायक होगा। चुनाव से पहले ओमप्रकाश चौटाला और उनकी पत्नी स्नेहलता के वायरल वीडियो ने संकेत दे दिए हैं कि भविष्य में पारिवारिक कलह और बढ़ सकता है।

मात्र 932 वोटों से बची कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सिंह सुरजेवाला की जमानत

उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सिंह सुरजेवाला मात्र 932 वोटों से ही अपनी जमानत बचा पाए। 28 जनवरी को हुए उपचुनाव में कुल 130828 वोट पड़े थे। इनमें से 51 बेलट पेपर वोट भी पड़े। इस प्रकार कुल मतों की संख्या 130859 हो गई। जमानत बचाने के लिए उम्मीदवार को कुल मतों का छठा हिस्सा लेना पड़ता है। इसलिए रणदीप सिंह सुरजेवाला को जमानत बचाने के लिए 21810 मतों की जरुरत है। उन्हें कुल 22742 वोट मिले। इस प्रकार रणदीप सिंह सुरजेवाला 932 वोटों से अपनी जमानत बचाने में कामयाब रहे।

जींद की जनता ने जीता दिल

यह मेरा पहला चुनाव था और इस चुनाव में जींद की जनता ने हमें काफी सहयोग किया है। हम चुनाव भले ही हार गए हों लेकिन जींद की जनता से मिले जनसमर्थन ने हमारा दिल जीत लिया है। हम जींद की जनता के इस फैसले को स्वीकार करते हैं। ईवीएम में काफी खामियां थी। कई ईवीएम के सीरियल नंबर नहीं मिल रहे थे। इसके कारण अंदर मौजूद सभी राजनीतिक दलो ने इसको लेकर अपना विरोध दर्ज करवाया है। हम विजयी प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा व भाजपा सरकार को शुभकामनाएं देते हैं। हम उम्मीद करते हैं कि डॉ. मिढ़ा सरकार के साथ मिलकर जींद की जनता की समस्याओं का समाधान करवाएं व जींद के विकास के लिए कार्य करें।
दिग्विजय चौटाला, प्रत्याशी जननायक जनता दल

विकास के मुद्दे पर जात-पात की राजनीति पड़ी भारी

जींद उपचुनाव में विकास उनका मुद्दा था लेकिन विकास के मुद्दे पर खट्टर सरकार की जात-पात की राजनीति भारी पड़ गई है। वह भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा को उनकी जीत पर बधाई देते हैं और वह उम्मीद करते हैं कि डॉ. मिढ़ा जींद के विकास की तरफ ध्यान देंगे। एक दर्जन से भी ज्यादा ईवीएम में काफी खामिया थी। हमनें सभी प्वाइंट लिखकर अधिकारियों को दे दिए हैं। भविष्य में पार्टी उन्हें जहां से चुनाव लडऩे के लिए बोलेगी वह वहीं से चुनाव लड़ेंगे। 
रणदीप सिंह सुरजेवाला, कांग्रेस प्रत्याशी एवं कैथल विधायक

हरियाणा के गठन के बाद यह-यह रहे विधायक

हरियाणा में पहला चुनाव 1967 में हुआ। इसमें कांग्रेस के दयाकृष्ण ने 26089 मत लेकर आजाद उम्मीदवार इंद्र सिंह को हरा दिया। इंद्र सिंह को 15548 मत मिले। 1968 में हुए चुनाव में कांग्रेस के दयाकृष्ण ने फिर से आजाद उम्मीदवार शंकर दास को हरा दिया। इस चुनाव में दयाकृष्ण ने 17733 और शंकर दास ने 16136 मत प्राप्त किए। 1972 के चुनाव में कांग्रेस (एस) के उम्मीदवार चौधरी दलसिंह ने 28281 मत प्राप्त कर कांग्रेस के दयाकृष्ण को हरा दिया। दयाकृष्ण को इस चुनाव में 21999 मत मिले। 1977 के चुनाव में चौधरी देवीलाल की लहर के बावजूद आजाद उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता 15751 वोट लेकर विधायक बने। उन्होंने जनता पार्टी के उम्मीदवार प्रताप सिंह को हरा दिया। प्रताप सिंह को इस चुनाव में 9646 वोट मिले। 1982 के चुनाव में फिर से समीकरण बदले और लोकदल की टिकट पर बृजमोहन सिंगला ने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। इस चुनाव में बृजमोहन सिंगल को 27045 व मांगेराम गप्ता को 26899 वोट मिले। 1987 में हुए चुनाव में परमानंद ने लोकदल की टिकट पर चुनाव लड़कर कांगे्रस के उम्मीदवार मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। परमानंद को 39323 व मांगेराम गुप्ता को 31221 वोट मिले। 1991 में कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता ने 35346 वोट लेकर जनता पार्टी के उम्मीदवार टेकराम को हरा दिया। टेकराम को 19213 वोट मिले। 1996 में हविपा की टिकट पर फिर से बृजमोहन सिंगला विधायक बने और उन्होंने कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को हरा दिया। बृजमोहन सिंगला को 40803 व मांगेराम गुप्ता को 22245 वोट मिले। 2000 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता ने इनेलो के गुलशन लाल को हरा दिया। मांगेराम गुप्ता को 41621 व गुलशन लाल को 36978 वोट मिले थे। 2005 के चुनाव में मांगेराम गुप्ता ने इनेलो के सुरेंद्र बरवाला को हराकर विधानसभा पहुंचे। इस चुनाव में गुप्ता को 43883 व बरवाला को 26448 वोट मिले। 2009 के चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने 34057 व कांग्रेस के मांगेराम गुप्ता को 26195 मत मिले। 2014 के विधानसभा चुनाव में इनेलो के डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने भाजपा के सुरेंद्र बरवाला को हरा दिया। डॉ. मिढ़ा को इस चुनाव में 31631 व बरवाला को 29374 वोट मिले।  

डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने राजनीति के इतिहास में लिखा नया अध्याय

भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने राजनीति के इतिहास में नया अध्याय लिखने का काम किया है। हरियाणा के 52 वर्ष के इतिहास में जींद विधानसभा की सीट पर जो भाजपा कभी अपना खाता भी नहीं खोल पाती थी उस सीट पर डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने राजनीति के बड़े-बड़े धुरंधरों को मात देखकर भारी मतों से जीत हासिल कर इस सीट पर कमल खिलाने का काम किया है। जिस तरह से डॉ. कृष्ण मिढ़ा के पिता स्वर्गीय डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने 2009 में कांग्रेस के दिग्गिज नेता एवं कांग्रेस सरकार में तत्कालीन मंत्री रहे मांगेराम गुप्ता को 7862 से पराजित किया था ठीक उसी तर्ज पर चलते हुए डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने कांग्रेस के दिग्गिज नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला व जजपा नेता दिग्विजय चौटाला को 12935 वोटों से पराजित करने का काम किया है। 

एक घंटा बाधित रही मतगणना

वीरवार को सुबह साढ़े आठ बजे के करीब मतगणना शुरू हो पाई। सात राउंडों तक तो मतगणना का कार्य ठीक-ठाक चला लेकिन दोपहर 12:35 पर आठवें राउंड में भाजपा के विरोधी प्रत्याशियों ने ईवीएम मशीन में सीरियल नंबर नहीं मिलने की बात कहकर विवाद खड़ा कर दिया। इस दौरान भाजपा के विरोधी दलों के समर्थक भारी संख्या में मतगणना केंद्र के बाहर भी जमा हो गए। ईवीएम में गड़बड़ी की अफवाह फैलते ही विरोधी दलों के समर्थकों ने मतगणना केंद्र के बाहर हंगामा खड़ा कर दिया। जिसके चलते लगभग एक घंटा मतगणना का कार्य प्रभावित हुई। बाद में पुलिस ने लाठी चार्ज कर हंगामा कर रहे लोगों को खदेड़ा और इसके बाद मतगणना का कार्य सुचारू रूप से चला। 

पहला राउंड
जेजेपी   3639
भाजपा  2835
कांग्रेस 2169
इनेलो  992
लोसुपा  705
नोटा  17
पहले राउंड में जेजेपी भाजपा से 804 वोटों से आगे
दूसरा राउंड
जेजेपी   4253
भाजपा  3719
कांग्रेस 1754
इनेलो  1051
लोसुपा        373
नोटा  25
दूसरे राउंड में जेजेपी भाजपा से 532 वोटों से आगे
तीसरा राउंड
जेजेपी   3334
भाजपा  2796
कांग्रेस 1890
इनेलो  893
लोसुपा  395
नोटा  12
जेजेपी 538 वोटों से भाजपा से आगे
चौथा राउंड
भाजपा   6131
जेजेपी   2217
कांग्रेस 1801
इनेलो  511
लोसुपा  254
नोटा  31
2038 वोटों के साथ भाजपा ने बढ़त बनाई
पांचवा राउंड
भाजपा   5571
लोसुपा  2053
जेजेपी   1872
कांग्रेस 1199
इनेलो  81
नोटा  41
3518 वोटों के साथ भाजपा ने बढ़त बनाई
छठवां राउंड
भाजपा   5360
लोसुपा 2737
कांग्रेस 1225
जेजेपी 1057
इनेलो   40
नोटा  64
2623 वोटों से भाजपा ने लोसुपा से बढ़त बनाई।
सातवां राउंड
जेजेपी   3031
भाजपा 2399
कांग्रेस 1609
लोसुपा 726
इनेलो   202
नोटा  35
632 वोटों के साथ जेजेपी ने भाजपा से बढ़त बनाई
आठवां राउंड
जेजेपी   3467
भाजपा 3369
कांग्रेस 2086
लोसुपा 544
इनेलो   148
नोटा  34
99 वोटों के साथ जेजेपी ने भाजपा से बढ़त ली
नौवां राउंड
भाजपा   5381
जेजेपी 2555
लोसुपा 2105
कांग्रेस 2043
इनेलो   192
नोटा  0
2026 वोटों के साथ भाजपा ने जेजेपी से बढ़त ली।
दसवां राउंड
भाजपा   5163
कांग्रेस 1815
जेजेपी 1521
लोसुपा 699
इनेलो   59
नोटा  25
भाजपा ने 3348 वोटों के साथ कांग्रेस से बढ़त ली।
11वां राउंड
भाजपा   4192
जेजेपा 4110
कांग्रेस 2020
लोसुपा 494
इनेलो   284
नोटा  0
82 वोटों के साथ भाजपा ने जेजेपी से बढ़त ली।
12वां राउंड
जेजेपी   4337
कांग्रेस 2081
भाजपा 1950
लोसुपा 934
इनेलो   205
नोटा  0
2256 वोटों से जेजेपी ने कांग्रेस से बढ़त ली।
13वां राउंड
जेजेपी   2388
भाजपा 1057
कांग्रेस 855
लोसुपा 0
इनेलो   0
नोटा  0
1331 वोटों से जेजेपी ने भाजपा से बढ़त ली।
फाइनल परिणाम
भाजपा   50556
जेजेपी 37631
कांग्रेस 22740
लोसुपा 13582
इनेलो   3454
नोटा  345
भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा 12935 वोटों से विजयी हुए। 







बांगर की धरती पर 52 सालों में पहली बार खिला कमल

--भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा 12935 वोटों से विजयी, लोसुपा प्रत्याशी की जमानत जब्त
--विरोधी दलों ने लगाए ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप

 जीत हासिल करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा।
जींद, 31 जनवरी (नरेंद्र कुंडू):- हरियाणा की सत्ता का सेमीफाइनल माने जा रहे जींद विधानसभा के उपचुनाव में भाजपा ने भारी मतों से जीत हासिल की है। हरियाणा के इतिहास में 52 सालों में जींद की धरती पर पहली बार कमल खिला है। भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने 12935 वोटों से जीत हासिल कर दिग्गज नेताओं को पटखनी देकर राजनीति के अध्याय में नया इतिहास रचने का काम किया है। इससे पूर्व जींद विधानसभा की सीट पर कांग्रेस व इनैलो का कब्जा रहा है। स्वयं डॉ. कृष्ण मिढ़ा के पिता स्वर्गीय डॉ. हरिचंद मिढ़ा इनैलो की टिकट पर दो बार जींद विधानसभा से विधायक रहे हैं। सत्ता के इस सेमीफाइनल को जीत कर भाजपा ने विरोधी दलों को एक बड़ा संदेश देने का काम किया है। वहीं विरोधियों ने ईवीएम में गड़बड़ी के आरोप लगाए हैं। जींद उपचुनाव में कांग्रेस प्रत्याशी रणदीप सिंह सुरजेवाला जमानत जब्त होने से बाल-बाल बच गए लेकिन लोकतंत्र सुरक्षा पार्टी प्रत्याशी विनोद आशरी अपनी जमानत नहीं बचा पाए। 
गौरतलब है कि 26 अगस्त को इनैलो विधायक डॉ. हरिचंद मिढ़ा के निधन के बाद जींद विधानसभा की सीट खाली हो गई थी। इसके बाद जनवरी 2019 में चुनाव आयोग द्वारा 28 जनवरी को जींद विधानसभा का उपचुनाव करवाने तथा 31 जनवरी को परिणाम की घोषणा की गई थी। जींद उपचुनाव की घोषणा के बाद सभी राजनीतिक दलों ने इस उपचुनाव में अपने प्रत्याशियों को उतारा था। जींद उपचुनाव को सत्ता का सेमीफाइनल इसलिए माना जा रहा था क्योंकि इस उपचुनाव के परिणाम आगामी विधानसभा चुनाव पर पडऩे हैं। इसलिए जींद उपचुनाव पर हरियाणा ही नहीं पूरे देश की नजरें टिकट हुई थी। जींद उपचुनाव इसलिए भी हॉट सीट बना हुआ था क्योंकि कांग्रेस ने यहां से रणदीप सिंह सुरजेवाला को अपना प्रत्याशी बनाया था और जननायक जनता पार्टी ने दिग्विजय चौटाला को यहां से चुनाव मैदान में उतारा था। रणदीप सिंह सुरजेवाला व दिग्विजय चौटाला के चुनाव मैदान में आने से यह हॉट सीट बन गई थी। इस कड़ी के तहत वीरवार को जींद विधानसभा उपचुनाव के परिणाम घोषित किए गए। इस उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने 12935 वोट हासिल कर जीत हासिल करते हुए रणदीप सिंह सुरजेवाला व दिग्विजय चौटाला जैसे दिग्गिजों को पटखनी देने का काम किया। हरियाणा के 52 साल के इतिहास में जींद की धरा पर पहली भाजपा ने जीत हासिल की है। भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने जींद की धरती पर कमल खिलाने का काम किया है। वहीं मतगणना के आठवें राऊंड के दौरान मतगणना हाल के अंदर मौजूद प्रत्याशियों द्वारा ईवीएम के सीरियल नंबर नहीं मिलने को लेकर अपना विरोध जताया। इसके चलते लगभग एक घंटे तक मतगणना कार्य प्रभावित हुआ। इसके चलते मतगणना केंद्र के बाहर खड़े विरोधी दलों के समर्थकों ने काफी हंगामा किया, जिन्हें खदेडऩे के लिए पुलिस को हल्का लाठीचार्ज भी करना पड़ा। 

किस पार्टी को कितने वोट मिले

जींद विधानसभा उपचुनाव के दौरान कुल 130828 वोट ईवीएम व 51 वोट पोस्टल से डाले गए थे। 
भाजपा  50566
जजपा 37631
कांग्रेस 22740
लोसुपा 13582
नोटा 345

Thursday, 10 January 2019

हरियाणा की सियायत में हर बार कांग्रेस के लिए तारणहार बने रणदीप सुरजेवाला

पांचवीं बार आमने-सामने होगा चौटाला व रणदीप परिवार
एक मंच पर दिखे कांग्रेस दिग्गिज, पर साथ निभाने पर दारमदार 

जींद, 10 जनवरी (नरेंद्र कुंडू):-  जब-जब भी कांग्रेस मुश्किल दौर से गुजरी है तब-तब रणदीप सिंह सुरेजवाला कांग्रेस के लिए तारणहार बनकर आए हैं। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने हर बार मुश्किल की घड़ी में कांग्रेस की नैया को मझधार से निकाल कर पार लगाने का काम किया है। भूपेंद्र सिंह हुड्डा के शासन काल में गुरुग्राम में हुए मारुती कांड के दौरान उठे बवाल के दौरान रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इस विवाद को निपटा कर कांग्रेस की शाख को बचाने का काम किया था। मारुती कांड के दौरान काफी बड़ा बवाल गुरुग्राम में हुआ था और उद्योगिक क्षेत्रों ने यहां से पलायन का निर्णय ले लिया था। इसके बाद जाट आरक्षण के दौरान भी हरियाणा में कांग्रेस को काफी विदोह का सामना करना पड़ा था। जगह-जगह जाटों ने आंदोलन शुरू करते हुए धरने-प्रदर्शन किए थे। इसके चलते रेलवे टै्रक तक जाम हो गए थे। जाट आंदोलन के दौरान बसें ही नहीं ट्रेनों के पहिए तक थम गए थे। जाट आंदोलन के दौरान भी रणदीप सिंह सुरजेवाला कांग्रेस के लिए संकट मोचन के रूप में सामने आए थे। जाट आंदोलन को निपटाने में रणदीप सिंह सुरजेवाला की अहम भूमिका थी। वहीं 2014 में चुनाव के बाद जब देश में भाजपा सत्ता पर काबिज हुई थी और कांग्रेस चारों खाने चित होकर सिकुडऩे लगी थी उस दौरान भी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कांग्रेस में प्राण फूंकने का काम किया था। रणदीप सिंह सुरजेवाला ने गत दिनों दूसरे प्रदेशों में हुए चुनाव में भी अच्छी भूमिका निभाने का काम किया था। अब जब जींद उपचुनाव में कांग्रेस को कोई भाजपा व जजपा को टक्कर देने के लिए कोई मजबूत चेहरा नहीं मिल रहा था तो भी रणदीप सिंह सुरजेवाला इस संकट की घड़ी में कांग्रेस के लिए तारणहार बनकर सामने आए हैं। रणदीप सिंह सुरजेवाला के चुनावी मैदान में आने के बाद इस उपचुनाव के समीकरण बदल गए हैं। कांग्रेसी नेताओं में फुट के कारण हरियाणा में बदनाम हो चुकी कांग्रेस को इस उपचुनाव में रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संजीवनी देने का काम किया है। रणदीप ङ्क्षसह के मैदान में आने से कांग्रेस के सभी दिग्गज एक मंच पर आ गए हैं।

एक मंच पर दिखे कांग्रेस दिग्गिज, पर साथ निभाने पर दारमदार

रणदीप सिंह सुरजेवाला के मैदान में आने के बाद कांग्रेस के दिग्गज नेता भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कैप्टन अजय यादव, कुमारी सैलजा, किरण चौधरी, कुलदीप बिश्रोई, प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर सभी एक मंच पर आ गए हैं। रणदीप सिंह के नामांकन दाखिल करवाने के लिए सभी दिग्गज नेता वीरवार को यहां पहुंचे थे लेेकिन यह सभी दिग्गज साथ निभाने के लिए कितने कारगर साबित होंगे यह समय बताएगा।

पांचवीं बार आमने-सामने होगा चौटाला-रणदीप परिवार

चौटाला परिवार व रणदीप सिंह सुरजेवाला का 36 का आंकड़ा रहा है। इस जींद विधानसभा उपचुनाव में चौटाला परिवार व रणदीप सिंह सुरजेवाला परिवार पांचवीं बार आमने-सामने होगा। इससे पहले 1993 में रणदीप सिंह सुरजेवाला के पिता शमशेर सिंह सुरजेवाला को राज्यसभा में भेजे जाने के कारण नरवाना विधानसभा सीट खाली हो गई थी। इसके चलते वहां उपचुनाव हुआ था। इसमें इनैलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला व रणदीप सिंह सुरजेवाला आमने-सामने हुए थे। इस उपचुनाव में रणदीप हार गए थे और ओमप्रकाश चौटाला विजयी हुए थे। इसके बाद 1996 में हुए विधानसभा चुनाव में रणदीप सिंह व ओमप्रकाश चौटाला फिर आमने-सामने हुए। इस बार बाजी रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मारी ली और ओमप्रकाश चौटाला को हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद 2000 में हुए विधानसभा चुनाव में ओमप्रकाश चौटाला ने जीत हासिल की और रणदीप सिंह यह चुनाव हार गए थे। 2005 में ओमप्रकाश चौटाला व रणदीप सिंह सुरजेवाला फिर आमने-सामने हुए थे। 2005 में ओमप्रकाश चौटाला के मुख्यमंत्री होने के दौरान रणदीप सिंह सुरजेवाला ने ओमप्रकाश चौटाला को हराने का काम किया था। अब 2019 में जींद विधानसभा के उपचुनाव में ओमप्रकाश चौटाला के पौत्र दिग्विजय चौटाला व रणदीप सिंह सुरजेवाला का आमना-सामना हुआ है। अब देखना यह है कि चौटाला परिवार व रणदीप ङ्क्षसह सुरजेवाला के बीच इस मुकाबले में बाजी किसके हाथ लगती है।

दिग्विजय चौटाला का नामांकन भरवाते सांसद दुष्यंत चौटाला। 

नामांकन दाखिल करवाने के बाद बाहर आते रणदीप सुरजेवाला। 






नामांकन भरने के दौरान खूब चले सियासी तीर

कांग्रेस और जजपा ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें
शहरी व गांव की पृष्टभूमि में उलझी सियासत

जींद, 10 जनवरी (नरेंद्र कुंडू):- आगामी 28 जनवरी को जींद में होने वाले विधानसभा के उपचुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दलों ने अपनी कमर कस ली है। वीरवार को नामांकन दाखिल करवाने का अंतिम दिन होने के कारण इनैलो, कांग्रेस और जजपा ने भी अपने चुनावी घोड़े मैदान में उतार दिए। जींद उपचुनाव को आगामी विधानसभा का सैमीफाइनल माना जा रहा है। इसी के चलते सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत इस उपचुनाव में झौंक दी है। कांग्रेस व जजपा ने अपनी प्रतिष्ठा को बचाने के लिए बड़े चेहरों को आगे कर दिया है। कांग्रेस ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी रणदीप सिंह सुरजेवाला को अपना उम्मीदवार बनाया है तो जजपा ने भी अपनी लहर को बरकरार रखने के लिए इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय चौटाला को युवा चेहरे के तौर पर मैदान में उतारा है। कांग्रेस व जजपा ने जींद उपचुनाव में बड़े चेहरों को मैदान में उतार कर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। वहीं इनैलो ने जिला परिषद के उपप्रधान उम्मेद सिंह रेढ़ू को अपने प्रत्याशी के तौर पर मैदान में उतारा है। कांग्रेस व जजपा द्वारा बड़े चेहरे मैदान में उतारने के बाद लोगों की नजरें अब सबसे ज्यादा जजपा व कांग्रेस पर टिकी हुई हैं। वीरवार को सभी राजनीतिक दलों ने अपने-अपने उम्मीदवारों के नामांकन दाखिल करवा दिए। नामांकन दाखिल करवाने के दौरान राजनीतिक दलों के बीच जमकर सियासत के तीर चले। नेताओं ने एक-दूसरे पर जमकर निशाना साधा। पूरा दिन शहर में राजनीति का माहौल गर्म रहा। राजनीतिक दलों के शक्ति प्रदर्शन के कारण जींद शहर पूरी तरह जाम हो गया। 

परिवारिक राजनीति को बढ़ावा दे रहा है दुष्यंत : अभय चौटाला

इनैलो नेता अभय सिंह चौटाला ने कहा कि जींद उपचुनाव जींद की जनता की लड़ाई है। इसलिए हमनें अपना उम्मीदवार जींद से ही उतारा है। हमारा उम्मीदवार साधारण है व ग्रामीण पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है लेकिन कांग्रेस के पास चुनाव लडऩे के लिए कोई चेहरा नहीं था। इसलिए कांग्रेस ने कैथल से उम्मीदवार को एम्पोर्ट किया है। वहीं जजपा के पास भी कोई प्रत्याशी नहीं था। इसलिए उन्होंने जींद के उम्मीदवार पर भरोसा करने की बजाए अपने परिवार के सदस्य को ही राजनीति में आगे बढ़ा दिया। दुष्यंत खुद सांसद हैं, उनकी मां एमएलए है लेकिन इसके बाद भी उनकी तृप्ति नहीं हो रही है। दुष्यंत केवल अपने परिवार की राजनीति को आगे बढ़ाने का काम कर रहे हैं। यह सेल्फिश लोग हैं। जींद की जनता बाहरी उम्मीदवार को वोट नहीं देगी। इनैलो इस उपचुनाव में भारी बहुमत से चुनाव जीतेगी। 

भाजपा की ए-बी टीम है इनैलो व जजपा : रणदीप 

कांग्रेस प्रत्याशी एवं कैथल के विधायक रणदीप सिंह सुरजरेवाला ने कहा कि जींद उपचुनाव से खट्टर सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो चुकी है। इनैलो व जजपा तो भाजपा की ही ए-बी टीम हैं। यह दोनों दल विकास की बात नहीं करते हैं। यह केवल मारने-काटने व जलाने की बात करते हैं। इन्होंने अपने शासन काल में तानाशाही को बढ़ावा दिया है। सत्ता में रहते हुए इन्होंने कभी भी जींद के विकास की तरफ ध्यान नहीं दिया। जींद की जनता बाहरी उम्मीदवार को वोट नहीं देगी। जींद की जनता के निर्णय के आगे सभी को सिर झुकाना पड़ेगा। जींद के विकास के लिए कांग्रेस ने उन्हें यहां भेजा है। वह उपचुनाव में जीत दर्ज करवा कर जींद में विकास कार्यों की झड़ी लगाने का काम करेंगे। 

मोदी, राहुल वर्सीज दिग्विजय बना जींद उपचुनाव : दुष्यंत

सांसद दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जींद उपचुनाव में जननायक जनता पार्टी से अपना उम्मीदवार इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला को बनाया है। पार्टी की कोर कमेटी ने दिग्विजय सिंह चौटाला के नाम पर अपनी सहमति जताई। इससे पहले पार्टी कार्यकर्ताओं से भी उम्मीदवार को लेकर राय ली गई थी। यह उपचुनाव निश्चित रूप से जेजेपी जीतेगी और इतिहास रचेगी। भाजपा और कांग्रेस इस उपचुनाव को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के स्तर का चुनाव मान कर अपने प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतरा है। चौ. देवीलाल की कर्मभूमि रही जींद की इस धरा से  दिग्विजय सिंह चौटाला पार्टी के विजयी अभियान की शुरूआत करेंगे और प्रदेश में 2019 में अगली सरकार जेजेपी पार्टी की होगी। जींद उपचुनाव नरेंद्र मोदी, राहुल गांधी वर्सीज दिग्विजय का चुनाव बन गया है। चाहे महम, उचाना या नरवाना का चुनाव हो हमारे परिवार ने हमेशा ही चुनौती देकर चुनाव लड़ा है। हमारी रगों में भी देवीलाल का खून है इसलिए हमनें इस चुनाव को चुनौती के तौर पर स्वीकार करते हुए दिग्विजय को मैदान में उतारा है।

भाजपा ने बदले राजनीति के मायने : बराला

भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला ने कहा कि भाजपा ने सत्ता में आने के बाद राजनीति के मायने ही बदल दिए हैं। इससे पहले प्रदेश में कांग्रेस या इनैलो दोनों दलों की सरकार रहती थी। नौकरियों में भाई-भतीजावाद को बढ़ावा मिलता था। भ्रष्टाचार का बोलबाला रहता था लेकिन भाजपा ने सत्ता में आने के बाद भाई-भतीजावाद व भ्रष्टाचार को खत्म कर विकास की तरफ जोर दिया है। सभी जिलों में बिना भेदभाव के विकास कार्य करवाए हैं। इस उपचुनाव में जींद की जनता विकास कार्यों पर मोहर लगाकर भाजपा को जिताने का काम करेगी। 

कांग्रेस व जजपा ने बढ़ाई भाजपा की मुश्किलें

जींद उपचुनाव में कांग्रेस व जजपा ने बड़े चेहरों को आगे कर भाजपा की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। भाजपा ने उम्मीदवारों की लंबी फेहरिस्त में से इनैलो छोड़कर भाजपा में शामिल हुए डॉ. कृष्ण मिढ़ा को अपना प्रत्याशी बनाया है। वहीं कांग्रेस व जजपा ने इस उपचुनाव में अपनी जीत पक्की करने के लिए बड़े चेहरों पर दाव खेला है। कांग्रेस ने राष्ट्रीय मीडिया प्रभारी एवं कैथल के विधायक रणदीप सिंह सुरजेवाला को आगे कर बड़ा दाव खेल दिया है। रणदीप सिंह सुरजेवाला की कांग्रेस पर अच्छी पकड़ है। कई धड़ों में बटी कांग्रेस रणदीप सिंह के नाम पर एकजुट हो गई है। रणदीप सिंह सुरजेवाला के नाम की घोषणा के साथ ही कांग्रेस के सभी दिग्गज नेताओं को एक मंच पर आना मजबूरी हो गया है। वहीं जजपा ने भी इनसो के राष्ट्रीय अध्यक्ष दिग्विजय सिंह चौटाला को युवा चेहरे के तौर पर मैदान में उतारा है। दिग्विजय चौटाला का भी युवा वर्ग में अच्छा जनाधार है। कांग्रेस व जजपा द्वारा बड़े चेहरे मैदान में उतारे जाने के कारण भाजपा की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। 

शहरी व ग्रामीण की पृष्टभूमि पर बिछी सियासत की बिसात

जींद उपचुनाव में शहरी व ग्रामीण की पृष्ठभूमि पर सियासत की बिसात बिछी है। भाजपा के उम्मीदवार डॉ. कृष्ण मिढ़ा व लोकतंत्र सुरक्षा मंच के उम्मीदवार विनोद आशरी शहरी पृष्ठभूमि से हैं और इन दोनों उम्मीदवारों की शहरी क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। वहीं जजपा के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला, कांग्रेस के उम्मीदवार रणदीप सिंह सुरजेवाला का ग्रामीण क्षेत्र में अच्छी पकड़ है। इनैलो का उम्मीदवार उम्मेद सिंह रेढू ग्रामीण क्षेत्र से है। 

रणदीप सिंह सुरजेवाला के नामकांन के लिए पहुंचे कांग्रेस के दिग्गज नेता।

अपने उम्मीदवार का नामांकन भरने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते अभय चौटाला। 

नामांकन दाखिल करने के बाद पत्रकारों से बातचीत करते दिग्विजय चौटाला। 






राजनीतिक दलों ने नामांकन भरने से पहले शहर में किया शक्ति प्रदर्शन


भाजपा से डॉ. कृष्ण मिढ़ा, जजपा से दिग्विजय चौटाला, कांग्रेस से रणदीप सिंह सुरजेवाला व अंशुल सिंगला ने निर्दलिय के तौर पर किया नामांकन

जींद, 10 जनवरी (नरेंद्र कुंडू):-  आगामी 28 जनवरी को जींद उपुचनाव के लिए उम्मीदवारों की घोषणा के साथ ही जींद में सियासत का पारा चढ़ गया है। 10 जनवरी को नामांकन का अंतिम दिन होने के चलते सभी राजनीतिक दलों ने नामांकन से पहले शहर में अपना शक्ति प्रदर्शन किया और शक्ति प्रदर्शन के बाद लघु सचिवालय में पहुंच कर अपना नामांकन भरा। नामांकन प्रक्रिया के दौरान किसी प्रकार की कोई अव्यवस्था नहीं हो इसके लिए प्रशासन द्वारा पुख्ता प्रबंध किए गए थे। इसके लिए प्रशासन की तरफ से दो ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किए गए है। जिला विकास एवं पंचायत अधिकारी राजेश कौथ तथा खंड विकास एवं पंचायत अधिकारी नरवाना राजेश टिवाना को ड्यूटी मजिस्ट्रेट नियुक्त किया गया। वहीं गोहाना रोड से लघु सचिवालय को आने वाले रास्ते पर बैरिगेट्स लगाए गए थे। उम्मीदवार के अलावा अन्य किसी भी वाहन को लघु सचिवालय में जाने की अनुमति नहीं थी। 10 जनवरी को नामांकन के अंतिम दिन भाजपा के उम्मीदवार डॉ. कृष्ण मिढ़ा, जजपा के उम्मीदवार दिग्विजय चौटाला, कांग्रेस के उम्मीदवार रणदीप सिंह सुरजेवाला, इनैलो से जिला परिषद के उपप्रधान उम्मेद सिंह रेढ़ू ने अपना नामांकन दाखिल करवाया। वहीं कांग्रेस की टिकट पर दावेदारी जताने वाले पूर्व मंत्री बृजमोहन सिंगला के पुत्र अंशुल सिंगला ने भी निर्दलिय प्रत्याशी के तौर पर अपना नामांकन दाखिल किया। नामांकन दाखिल करने से पूर्व भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा ने शहर के रानी तालाब से लेकर लघु सचिवालय तक भारी काफिले के साथ शक्ति प्रदर्शन किया। इस दौरान उनके साथ भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, प्रदेश के शिक्षा मंत्री रामबिलाश शर्मा, सोनीपत के सांसद रमेश कौशिक, परिवहन मंत्री कृष्ण पवार, उचाना विधायक प्रेमलता, जिलाध्यक्ष अमरपाल राणा सहित पार्टी के कई अन्य पदाधिकारी भी साथ थे। वहीं रणदीप सिंह सुरजेवाला ने कांग्रेस भवन से लेकर लघु सचिवालय तक अपना शक्ति प्रदर्शन किया। पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, कुमारी शैलजा, कुलदीप बिश्रोई, किरण चौधरी, पूर्व शिक्षा मंत्री गीता भुक्कल, कैप्टन अजय यादव सहित कांग्रेस के कई दिग्गज नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला का नामांकन दाखिल करवाने पहुंचे। इनैलो प्रत्याशी उम्मेद सिंह रेढ़ू का नामांकन करवाने के लिए नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला, अशोक अरोड़ा, बसपा के प्रदेश प्रभारी प्रकाश भारती सहित अन्य कई पदाधिकारी मौजूद रहे। वहीं जजपा के प्रत्याशी दिग्विजय का नामांकन दाखिल करवाने के लिए सांसद दुष्यंत चौटाला, प्रदेशाध्यक्ष निशान सिंह, केसी बांगड़ सहित पार्टी के अन्य सभी वरिष्ठ पदाधिकारी साथ मौजूद रहे।   

माटी का कर्ज उतारने के लिए पार्टी ने दिया मौका

जींद का उपचुनाव जींद के विकास के लिए लड़ा जाएगा। यह चुनाव हरियाणा में नई बयार का चुनाव है। जींद की जनता के आशीर्वाद से जींद को विकास के रास्ते पर आगे बढ़ाने का काम किया जाएगा। जींद उपचुनाव से खट्टर सरकार की उल्टी गिनती शुरू हो गई है। कैथल, हिसार, भिवानी, रोहतक की तर्ज पर जींद का विकास करवाया जाएगा। इनैलो व जजपा खट्टर सरकार की ए-बी टीम हैं। यह दोनों पार्टी हरियाणा के विकास की बजाए तानाशाही, तोडफ़ोड़, मारने-काटने की बाते करती हैं। वहीं भाजपा सरकार ने भी हरियाणा को जलाने का काम किया है। कांग्रेस पार्टी ने जींद की माटी का कर्ज उतारने के लिए उन्हें मौका दिया है। वह जींद की जनता के आशीर्वाद से इस चुनाव में जीत दर्ज करवा कर जींद के विकास के लिए कार्य करेंगे।
रणदीप सिंह सुरजेवाला, उम्मीदवार कांग्रेस पार्टी

जींद की जनता 10 माह के लिए मुझ पर विश्वास करके देखे

जींद की धरती को राजनीति का गढ़ माना जाता है। उन्होंने अपनी पार्टी की घोषणा भी जींद की धरती से ही की थी। यह चुनाव उनका पहला चुनाव है इसलिए वह जींद की जनता से अपील करेंगे की आगामी 10 माह के लिए जींद की जनता उन पर विश्वास करके देखे। इन 10 माह में जींद के लिए करवाए गए विकास कार्यों के बूते वह आगामी विधानसभा चुनाव में जनता के बीच वोट मांगने के लिए आएंगे। उन्हें जींद की जनता पर पूरा विश्वास है। जींद की जनता से उन्हें सिरसा की जनता से भी ज्यादा प्यार मिला है। दुष्यंत की बढ़ती लोकप्रियता से घबरा कर कांग्रेस ने जींद उपचुनाव में रणदीप सिंह सुरजेवाला को मैदान में उतार कर सबसे बड़ा दाव खेला है। ताकि वह दुष्यंत को कमजोर कर सकें।
दिग्विजय चौटाला, उम्मीदवार जननायक जनता पार्टी

बाहरी उम्मीदवारों को नहीं स्वीकार करेगी जींद की जनता

उन्होंने पूरी निष्ठा व ईमानदारी से पार्टी की सेवा की है। पार्टी की सेवा व ईमानदारी को देखते हुए पार्टी ने उन्हें चुनाव मैदान में उतारा है। जींद की जनता ने उन्हें जिला परिषद की सीट पर विजयी बनाकर जिला परिषद में भेजने का काम किया है। अब जींद की जनता उन्हें विधानसभा में भेजने का काम करेगी। जजपा व कांग्रेस के पास चुनाव लडऩे के लिए कोई मजबूत चेहरा नहीं था। इसलिए कांग्रेस ने कैथल से उम्मीदवार को इम्पोर्ट किया है और जजपा ने जींद के स्थानीय कार्यकर्ता पर विश्वास करने की बजाए अपने परिवार के सदस्य को ही टिकट दिया है। कांग्रेस व जजपा दोनों पार्टियों के उम्मीदवार बाहरी हैं और जींद की जनता इन बाहरी उम्मीदवारों को स्वीकार नहीं करेगी। भाजपा के पास भी अपना कोई उम्मीदवार नहीं था। इसलिए भाजपा ने भी इनैलो के कार्यकर्ता को अपने साथ शामिल कर उस पर ही दाव खेला है। जींद उपचुनाव में इनैलो पार्टी की जीत पक्की है। पिछली दो योजना में भी इनैलो के उम्मीदवार ने जींद में अपनी जीत दर्ज करवाई है।
उम्मेद सिंह रेढ़ू, उम्मीदवार इनैलो

भाजपा के विकास कार्यों पर अपनी मोहर लगाएगी जींद की जनता

जींद उपचुनाव में जींद की जनता भाजपा सरकार द्वारा करवाए गए विकास कार्यों पर अपनी मोहर लगाएगी। उनके पिता जी स्वर्गीय डॉ. हरिचंद मिढ़ा ने जींद की जनता की निस्वार्थ भाव से सेवा की थी। इसलिए जींद की जनता ने उन्हें दो बार यहां से विधायक बनाने का काम किया था। उनके पिता के साथ-साथ वह भी पिछले 10 वर्षों से लोगों के बीच रहकर जनता की सेवा करने का काम कर रहे हैं। इसलिए इस उपचुनाव में भाजपा की जीत पक्की है। बाहरी उम्मीदवारों को जींद की जनता किसी भी कीमत पर अपना वोट नहीं देगी क्योंकि इन उम्मीदवारों को केवल चुनाव के समय ही उनकी याद आती है। भाजपा के सभी पदाधिकारी व कार्यकर्ता उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर चुनाव लड़ेंगे।
डॉ. कृष्ण मिढ़ा, उम्मीदवार भाजपा

नामांकन दाखिल कर दिया है पार्टी के आदेश के बाद लेंगे फैसला

कांग्रेस की सीट पर उनकी दावेदारी काफी मजबूत थी लेकिन किसी कारण से पार्टी से उन्हें टिकट नहीं मिल पाई है। हमने अपना नामांकन दाखिल करवा दिया है बाकि पार्टी के जो आदेश मिलेंगे उसके बाद फैसला लिया जाएगा।
अंशुल सिंगला, उम्मीदवार निर्दलिय
रणदीप सिंह सुरजेवाला

दिग्विजय चौटाला 

डॉ. कृष्ण मिढ़ा 

उम्मेद सिंह रेढू 

अंशुल सिंगला

भाजपा प्रत्याशी डॉ. कृष्ण मिढ़ा का नामांकन दाखिल करवाने के लिए जाते शिक्षा मंत्री, सांसद रमेश कौशिक, विधायक प्रेमलता व अन्य भाजपा नेता। 






 









Sunday, 6 January 2019

टिकटार्थियों को साधने के प्रयास में जुटी भाजपा

--भाजपा नेताओं को सता रहा है टिकटार्थियों के बागी होने का भय
--भाजपा नामांकन के आखरी दिन करेगी उम्मीदवार के नाम की घोषणा
--भाजपा के उम्मीदवार की घोषणा के इंतजार में दूसरे राजनीतिक दल

जींद, 6 जनवरी (नरेंद्र कुंडू):- आगामी 28 जनवरी को होने वाला जींद विधानसभा उपचुनाव भाजपा के लिए किसी अग्रि परीक्षा से कम नहीं है। इस परीक्षा को पास करने के लिए भाजपा नेताओं द्वारा पूरी एक्सरसाइज की जा रही है। इस जींद उपचुनाव में जीत हासिल करने के लिए सभी राजनीतिक दल अपने-अपने पार्टी के रथ को खींचने के लिए अश्वमेघ यज्ञ के घोड़े की तलाश में हैं। भाजपा के पास इस समय टिकटार्थियों की लंबी कतार लगी हुई है। टिकटार्थियों की इस लंबी कतार ने भाजपा नेताओं की सांसें फुला रखी हैं। भाजपा नेताओं को टिकटार्थियों के बागी होने का भय सता रहा है। इसलिए भाजपा नेता उम्मीदवार की घोषणा करने के फैसला में जल्दबाजी करने से बच रहे हैं। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा पार्टी अपने उम्मीदवार की घोषणा 9 जनवरी को करेगी। ताकि टिकट नहीं मिलने से मायूस होने वाले अन्य टिकटार्थियों को बागी होने से रोका जा सके। क्योंकि 10 जनवरी को नामांकन की आखिरी तारीख है और यदि भाजपा 9 को अपने उम्मीदवार की घोषणा करती है तो समय के अभाव में टिकट नहीं मिलने से मायूस दूसरे टिकटार्थी नामांकन नहीं कर पाएंगे। वहीं दूसरे राजनीतिक दलों की नजरें भी भाजपा की तरफ टिकी हुई हैं। क्योंकि भाजपा द्वारा उम्मीदवार की घोषणा के बाद ही दूसरे राजनीतिक दल अपने समीकरण तय कर अपने उम्मीदवार की घोषणा करेंगे। वहीं सूत्रों से मिल रही जानकारी से यह भी सामने आया है कि भाजपा में टिकट की लाइन में खड़े कई टिकटार्थी लगातार दूसरे दलों के भी सम्पर्क में हैं।

कई उम्मीदवारों के नामाकंन पत्र हो चुके हैं तैयार, बस टिकट का है इंतजार

उपचुनाव में चुनावी मैदान में अपनी किस्मत आजमाना के लिए तैयार खड़े कई उम्मीदवारों ने तो अपना नामांकन पत्र तैयार करवाने व बैंक, बिजली निगम तथा अन्य विभागों से एनओसी लेने जैसी प्रक्रिया पहले ही पूरी करवा ली है। इन उम्मीदवारों को इस बात का भय सता रहा है कि यदि उन्हें उनकी इच्छुक पार्टी से टिकट नहीं मिला तो वह किसी दूसरे दल से या निर्दलिय चुनाव लड़ सकें। नामांकन के लिए अन्य प्रक्रिया पूरी करने में उनका समय खराब होने से बच सके व समय रहते वह अपना नामांकन करवा सकें।

संघ की तरफ से भी भाजपा पर बढ़ा दबाव

उपचुनाव में टिकट को लेकर भाजपा में चल रहे घमासान के बीच राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ का दबाव भी भाजपा नेताओं पर लगातार बढ़ता जा रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार भाजपा इस समय केवल चुनाव जीत कर आने वाले उम्मीदवार पर दांव खेलना चाहती है और इसके लिए वह दूसरी पार्टी के मजबूत उम्मीदवार को भी अपने साथ शामिल कर टिकट देने से पीछे हटने वाली नहीं है लेकिन उधर से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों ने भी भाजपा नेताओं पर संघ से संबंध रखने वाले उम्मीदवार को टिकट देने के लिए दबाव बनाया हुआ है।

भाजपा के पदाधिकारी पिछले कई दिनों से जींद में डाले हुए हैं डेरा

चुनाव में जीत के लिए भाजपा पूरे प्रयास कर रही है। भाजपा के नेता पार्टी के कार्यकर्ताओं से फीडबैक लेने से लेकर बूथ स्तर तक पर अपनी फिल्डिंग तैयार कर रहे हैं। इसके लिए भाजपा के प्रांत स्तर के कई नेता पिछले कई दिनों से जींद में ही अपना डेरा डाले हुए हैं। ताकि उपचुनाव में दांव पर लगी पार्टी की शाख को बचाया जा सके।