Sunday, 25 August 2013

सफेद मक्खी को कंट्रोल करने में मांसाहारी कीट सबसे कारगर हथियार : डा. सिहाग

जिंक, यूरिया व डी.ए.पी. का घोल तैयार कर फसल पर निरंतर करें छिड़काव

नरेंद्र कुंडू 
जींद। कृषि विभाग के जिला उप-निदेशक डा. रामप्रताप सिहाग ने कहा कि प्रदेश में कपास की फसल में जहां-जहां किसानों ने सफेद मक्खी को कीटनाशकों की सहायता से कंट्रोल करने के लिए का प्रयास किया है, वहां-वहां सफेद मक्खी का प्रकोप निरंतर बढ़ता जा रहा है। कई जिलों में तो स्थिति ऐसी हो चुकी है कि सफेद मक्खी के प्रकोप के कारण कई-कई एकड़ में खड़ी कपास की फसल पूरी तरह से तबाह हो गई है लेकिन जींद जिले के कीटाचार्य किसानों ने डा. सुरेंद्र दलाल द्वारा दिए गए कीट ज्ञान के बूते पर फसल में मौजूद मांसाहारी कीटों की सहायता से ही सफेद मक्खी को कंट्रोल कर यह सिद्ध कर दिया है कि किसी भी प्रकार के शाकाहारी कीट को नियंत्रित करने के लिए किसी कीटनाशक की जरुरत नहीं है, बल्कि शाकाहारी कीटों को नियंत्रित करने के लिए फसल में मौजूद प्राकृति कीटनाशी ही काफी हैं। इसी का परिणाम है कि अभी तक जींद ब्लाक में कहीं पर भी सफेद मक्खी की संख्या कपास की फसल में नुक्सान पहुंचाने के कागार पर नहीं पहुंच पाई है। डा. सिहाग बुधवार को निडानी तथा रधाना गांव में चल रही डा. सुरेंद्र दलाल किसान खेत पाठशालाओं में फसल का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे थे। इस अवसर पर उनके साथ कृषि विकास अधिकारी डा. कमल सैनी, डा. रमेश, डा. शैलेंद्र चहल भी मौजूद थे।
डा. सिहाग ने किसान पाठशालाओं में मौजूद किसानों को सम्बोधित करते हुए कहा कि जहां-जहां किसानों ने सफेद मक्खी के साथ छेडख़ानी की है, वहां-वहां स्थिति आज बहुत भयंकर रुप धारण कर चुकी है। हिसार जिले में इसके ताजा परिणाम देखने को मिल रहे हैं। आज हिसार जिले में सफेद मक्खी का प्रकोप चरम पर है और इसके प्रकोप के कारण सैंकड़ों एकड़ फसल नष्ट हो चुकी है। डा. सिहाग ने निडानी के किसानों की पीठ थपथपाते हुए कहा कि निडानी के किसानों ने स्कूली विद्यार्थियों को इस मुहिम से जोड़कर एक नई पहल शुरू की है। इससे आक्रोषित होकर आज हिसार जिले के किसान रोड जाम कर रहे हैं। कीटाचार्य किसान महाबीर पूनिया, जयभगवान, सुरेंद्र, जगमेंद्र, सुरेश ने बताया कि किसानों को फसल में मौजूद किसी भी शाकाहारी कीट के साथ छेड़छाड़ नहीं करनी चाहिए और न ही कीटनाशक के माध्यम से उसे नियंत्रित करने की कोशिश करनी चाहिए। किसान कीट के साथ जितनी भी छेड़छाड़ करेगा या उसे नियंत्रित करने की कोशिश करेगा, उस कीट की संख्या उतनी ही ज्यादा बढ़ेगी। इस कीट को नियंत्रित करने के लिए फसल में काफी संख्या में मांसाहारी कीट मौजूद रहते हैं, जो इसका शिकार कर इसे कंट्रोल कर लेते हैं। फिलहाल कपास की फसल में मकडिय़ां, क्राइसोपा, लेडी बीटल काफी संख्या में मौजूद हैं। यह सभी मांसाहारी कीट सफेद मक्खी के परभक्षी हैं और बड़े ही चाव से सफेद मक्खी का शिकार करते हैं। उन्होंने अपनी फसलों का उदहारण देते हुए बताया कि उनकी फसलों में भी सफेद मक्खी है लेकिन उन्होंने कभी भी उसे नियंत्रित करने के लिए किसी भी कीटनाशक का प्रयोग नहीं किया। उन्होंने कहा कि कपास की फसल में मौजूद सफेद मक्खी एक रस चूसक कीट है और यह रस चूसकर अपना जीवन चक्र चलाता है। इसलिए किसानों को चाहिए कि वे फसल की खुराक पर ज्यादा ध्यान दें। ऐसी समय में पौधों को पौषक तत्वों की ज्यादा जरुरत होती है। इसलिए किसानों को चाहिए कि वे 100 लीटर पानी में आधा किलो जिंक, अढ़ाई किलो यूरिया तथा अढ़ाई किलो डी.ए.पी. का घोल तैयार कर प्रति एकड़ में इसका छिड़काव करें। हर 10 दिन बाद इस घोल का छिड़काव बेहद जरुरी है। इससे पौधे को पर्याप्त मात्रा में खुराक मिलती रहेगी और पौधा निरंतर अपनी बढ़वार करता रहेगा। कृषि विकास अधिकारी डा. कमल सैनी ने कहा कि जींद जिले के कीटाचार्य किसानों ने अपने प्रयोगों से यह सिद्ध कर दिया है कि किसी भी कीट को नियंत्रित करने के लिए किसी कीटनाशक की जरुरत नहीं है। जींद ब्लाक के अलावा अन्य जिलों में सफेद मक्खी के बढ़ते प्रकोप का यह ताजा उदहाराण इनकी इस सफलता का गवाह है। क्योंकि दूसरे क्षेत्र के किसानों ने सफेद मक्खी को कंट्रोल करने के लिए बेइंताह कीटनाशकों का प्रयोग किया है लेकिन वहां सफेद मक्खी कंट्रोल होने की बजाए निरंतर बढ़ती जा रही है। इस दौरान निडानी गांव के राजकीय हाई स्कूल के 2 दर्जनभर से भी ज्यादा विद्यार्थी भी कीट ज्ञान अर्जित करने के लिए किसान खेत पाठशाला में पहुंचे थे। 
 स्कूली बच्चों को कीटों की पहचान करवाता किसान तथा कीट ज्ञान हासिल करने के लिए पाठशाला में भाग लेते बच्चे।

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