Monday, 7 October 2013

कीटों की मास्टरनियां अब गीतों के माध्यम से किसानों को देंगी जहरमुक्त खेती का संदेश

दूरदर्शन पर गीत गाती नजर आएंगी कीटों की मास्टरनियां 

दूरदर्शन की टीम ने गीतों की रिकार्डिंग के लिए महिलाओं को दिया निमंत्रण

नरेंद्र कुंडू 
जींद। कीटों की मास्टरनियां अब गीतों के माध्यम से देश के किसानों को जहरमुक्त खेती के लिए प्रेरित करेंगी। इसके लिए इन मास्टरनियों द्वारा कीटों के पूरे जीवनचक्र पर आधा दर्जन के करीब मार्मिक गीतों की रचना की गई हैं। महिलाओं के गीतों की रिकार्डिंग के लिए दूरदर्शन हिसार के निदेशक द्वारा महिलाओं को हिसार स्थित दूरदर्शन के स्टूडियो में आमंत्रित किया गया है। गीतों की रिकार्डिंग के लिए रविवार को निडानी, निडाना व ललितखेड़ा गांव से 2 दर्जन के करीब महिलाएं स्टूडियों में जाएंगी।
जींद जिले में पिछले लगभग 7-8 वर्षों से जहरमुक्त खेती की मुहिम चल रही है। इस मुहिम को आगे बढ़ाने में पुरुष किसानों के साथ-साथ महिला किसान भी अहम भूमिका निभा रही हैं। निडानी, निडाना, ललितखेड़ा व रधाना गांव से लगभग 100 से भी ज्यादा महिलाएं इस मुहिम के साथ जुड़ी हुई हैं। जींद जिले के लोग इन वीरांगनाओं को कीटों की मास्टरनियों के नाम से जानते हैं। जींद जिले में चल रही जहरमुक्त खेती का मुख्य उद्देश्य किसानों को कीटों के बारे में जानकारी देकर कम खर्च से अधिक पैदावार देने के साथ-साथ खाने की थाली को जहरमुक्त करना है। इस मुहिम को आगे बढ़ाने के लिए कीटों की इन मास्टरनियों द्वारा कीटों पर अधारित लगभग आधा दर्जन गीत तैयार किए गए हैं। इन गीतों में महिलाओं ने कीट हमारे खेत में क्यों आते हैं?, कीटों का फसल में क्या महत्व है?, कीटों के पूरे जीवनचक्र तथा क्रियाकलापों का विस्तार से वर्णन किया गया है। कीटाचार्या अंग्रेजो, राजवंती, सविता, शीला, नारो, सुषमा, नीलम का कहना है कि किसानों द्वारा जानकारी के अभाव में फसलों में अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग किया जा रहा है। इसके चलते आज मानव जाति पर एक बहुत बड़ा खतरा मंडराने लगा है। मनुष्य को भिन्न-भिन्न किस्म की गंभीर बीमारियों ने अपनी चपेट में ले लिया है। कैंसर जैसी लाइलाज बीमारी के बढऩे के पीछे भी फसलों में पेस्टीसाइड का अधिक प्रयोग करना पाया गया है। उन्होंने बताया कि फसलों में अधिक कीटनाशकों के इस्तेमाल से जहां हमारा खान-पान व वातावरण दूषित हो रहा है, वहीं किसान के सिर पर फसलों में मौजूद लाखों किस्म के बेजुबान कीटों की हत्या के पाप का बोझ भी बढ़ रहा है। किसान यह सब इसलिए कर रहा है क्योंकि किसान इस चीज की जानकारी नहीं है। किसान के पास आज खुद का ज्ञान नहीं है और दूसरों के ज्ञान केे बूते ही किसान आज इस अंतहीन जंग के मैदान में डटा हुआ है। महिला किसानों का कहना है कि हमारी संस्कृति में महिलाओं के गीतों का बहुत महत्व है। विवाह-शादी जैसे शुभ कार्यों में महिलाओं द्वारा मंगल गीत गाए जाते हैं। बिना महिलाओं के गीतों के इस तरह के शुभ कार्य अधुरे से नजर आते हैं। जींद जिले के किसानों द्वारा जहरमुक्त खेती की जो मुहिम चलाई गई है, वह एक जनहित का कार्य है। इस मुहिम में समस्त मानव जाति की भलाई छिपी हुई है। जनहित के कार्य से शुभ कोई कार्य नहीं होता। इसलिए उन्होंने इस शुभ कार्य को पूरा करने के लिए इन गीतों की रचना की है। गीतों के माध्यम से वह देश के किसानों को जहरमुक्त खेती का संदेश देना चाहती हैं। ताकि अधिक से अधिक किसानों को प्रेरित कर इस मुहिम से जोड़ा जा सके।

यह है महिलाओं द्वारा रचित गीत

'पिया जी तेरा हाल देख कै मेरा कालजा धड़कै हो, तेरे कांधे ऊपर जहर की टंकी मेरै कसुती रड़कै हो'। 'किडय़ां का कट रहया चालाए ए' मैनै तेरी सूं देखया ढंग निराला ए मैनै तेरी सूं'। 'म्हारी पाठशाला में आईए हो-हो नंनदी के बीरा तैनै न्यू तैनै न्यू मित्र कीट दिखाऊं हो हो नंनदी के बीरा'। 'मैं बिटल हूं मैं किटल तुम समझो मेरी महता को'। 'ए बिटल म्हारी मदद करो हामनै तेरा एक सहारा है, जमीदार का खेत खालिया तनै आकै बचाना है'। 'निडाना-खेड़े की लुगाइयां नै बढ़ीया स्कीम बनाई है, हमनै खेतां में लुगाइयां की क्लाश लगाई है'।  'अपने वजन तै फालतु मास खावै वा लोपा माखी आई है' इत्यादि।

दूरदर्शन के इतिहास में जुड़ेगा नया अध्याय 

जींद जिले के किसानों ने एक अनोखी मुहिम शुरू की है। इस मुहिम में महिलाओं का अहम योगदान हैं। महिलाओं द्वारा आज तक जितने भी गीत गाए जाते थे, वह सभी हमारे आम जीवन पर आधारित थे लेकिन यहां की महिलाओं ने कीटों के जीवन पर गीत लिखकर एक अलग तरह की शुरूआत की है। इन गीतों में महिलाओं ने यह दर्शाया है कि कीटों का हमारी फसलों में क्या महत्व है। महिलाओं की जनहित की भावना को देखते हुए दूरदर्शन ने उन्हें गीतों की रिकार्डिंग के लिए आमंत्रित किया है। इस तरह के गीतों की रिकार्डिंग कर दूरदर्शन के इतिहास में भी एक नया अध्याय जुड़ेगा। इसेस पहले दूरदर्शन पर इस तरह के किसी कार्यक्रम की रिकार्डिंग नहीं की गई है।
जिले सिँह जाखड़, डायरैक्टर
दूरदर्शन, हिसार 

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