Monday, 7 October 2013

अंधाधुंध कीटनाशकों के इस्तेमाल से बढ़ रहा है कैंसर का प्रकोप

फसल में नुक्सान पहुंचाने के आर्थिक स्तर से कोसों दूर हैं शाकाहारी कीट

नरेंद्र कुंडू 
जींद। हाल ही में हुए एक ताजा सर्वे की रिपोर्ट के अनुसार पंजाब में कपास बैल्ट वाले क्षेत्र में हर रोज औसतन 18 लोग कैंसर के कारण काल का ग्रास बन रहे हैं। हरियाणा में तो स्वास्थ्य विभाग के पास कैंसर के वास्तुविक स्थिति का सही रिकार्ड ही नहीं है। यू.एस.ए. की पर्यावरण संरक्षण एजैंसी के अनुसार दुनिया में विभिन्न किस्म के पेस्टीसाइडों में से 68 किस्म के ऐसे फंजीनाशक, फफुंदनाशक, खरपतवार नाशक और कीटनाशकहैं जो कैंसर कारक सिद्ध हो चुके हैं लेकिन इसके बावजूद भी भारत में इन पेस्टीसाइडों का धड़ले से प्रयोग हो रहा है। यह बात कीटाचार्य किसान सुरेश अहलावत ने राजपुरा भैण गांव में चल रही डा. सुरेंद्र दलाल बहुग्रामी किसान खेत पाठशाला में किसानों को सम्बोधित करते हुए कही। इस अवसर पर कीटाचार्य किसानों ने कपास की फसल में मौजूद कीटों का अवलोकन भी किया।
अहलावत ने कहा कि तम्बाकू को कैंसरकारक बताकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। जबकि वास्तविकता कुछ ओर ही है। उन्होंने कहा कि पंजाब में तो तम्बाकू का सेवन बिल्कुल नहीं होता और वहां की महिलाएं तो तम्बाकू के सेवन से कोसों दूर हैं लेकिन फिर भी वहां कैंसर के मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसमें पुरुषों की बजाए महिलाओं की संख्या ज्यादा है। पंजाब में एक लाख लोगों के पीछे 359 महिलाएं और 325 पुरुष कैंसर से पीडि़त हैं। किसान सत्यवान ईगराह, कृष्ण ईंटल, प्रकाश भैण, सुरेंद्र निडाना, रणबीर ईगराह, दिनेश रधाना ने फसल में कीटों के अवलोकन के बाद बताया कि कपास के इस खेत में सफेद मक्खी की औसतन संख्या 1.9, हरेतेले की संख्या 0.6 और चूरड़े की संख्या शून्य है, जो कि फसल में नुक्सान पहुंचाने के स्तर से कोसों दूर है। उन्होंने बताया कि इन शाकाहारी कीटों को कंट्रोल करने के लिए इस समय फसल में क्राइसोपा के बच्चे, इनो, इरो, सिंगु बुगड़ा, बिन्दुआ, दीदड़ बुगड़ा, हथजोड़ा, भूरी पुष्पक, बीटल, मकड़ी सिरफड़ मक्खी के बच्चे मौजूद हैं। इसकेअलावा शाकाहारी सूबेदार मेजर कीटों में मिलीबग, अल, माइट, लाल व काला बानिया तथा तम्बाकु वाली सूंडी भी मौजूद हैं। किसानों ने बताया कि सफेद मक्खी के प्रकोप के बाद फसल के पत्ते ऊपर से मुड़ जाते हैं और पत्तों का रंग पीला पड़ जाता है। हरे तेले के प्रकोप से पत्ते नीचे की तरफ मुड़ जाते हैं और पत्ते के चारों तरफ लाल रंग के निशान दिखाई देने लगते हैं। उन्होंने कहा कि आज किसानों के सामने कई गंभीर समस्याएं हैं। जब तक किसान को खुद का ज्ञान नहीं होगा, तब तक किसान इन समस्याओं से पार नहीं पा सकता। इसलिए किसान को खुद का ज्ञान पैदा करना होगा और खुद के ही बीज तैयार करने होंगे।

 फसल में कीटों का अवलोकन करते किसान। 

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