बिल्ली करती हैं राजस्व विभाग के रिकार्ड की रखवाली

रिकार्ड को चूहों से बचाने के लिए कर्मचारियों ने पाली तीन बिल्लियां

रिकार्ड रूम में रखा है जींद की रियासत तक का रिकार्ड

बिल्लियों के लिए हर रोज खरीदा जाता है एक लीटर दूध

नरेंद्र कुंडू       
जींद। आज तक सुरक्षा गार्डों को तो किसी विभाग या कार्यालय की रखवाली करते देखा या सुना था लेकिन जींद जिले में एक ऐसा विभाग भी है जिसकी रखवाली बिल्लियां कर रही हैं। पुलिस अधीक्षक कार्यालय की बिल्डिंग में बने राजस्व विभाग के रिकार्ड रूम में रखे रिकार्ड की रखवाली पिछले दो वर्षों से बिल्लियां कर रही हैं। राजस्व विभाग के कर्मचारियों द्वारा रिकार्ड रूम में रखे गए रिकार्ड को चूहों, छिपकलियों से बचाने के लिए तीन बिल्लियां पाली गई हैं। कर्मचारियों द्वारा बिल्लियों के लिए हर रोज एक लीटर दूध खरीदा जाता है। विभाग के कर्मचारियों की समझदारी के चलते नामात्र के खर्च में बेश कीमती रिकार्ड की सुरक्षा की जा रही है। जिला राजस्व के रिकार्ड रूम में जींद की रियासत के समय का पूरा रिकार्ड रखा हुआ है। पिछले दो वर्षों से तीन बिल्लियां यहां ड्यूटी दे रही हैं।
रिकार्ड रूम में गोद में बिल्ली को बैठाकर काम करते कर्मचारी।
जिला राजस्व के रिकार्ड रूम में जींद की रियासत (1763 ) के समय का रिकार्ड रखा है। इस रिकार्ड रूम में जींद के रियासत बनने से लेकर आज तक का पूरा लेखा-जोखा है। उर्दू में लिखा गया रिकार्ड भी यहां रखा हुआ है। रिकार्ड रूम में कई वर्षों पुराना रिकार्ड रखा होने तथा रिकार्ड काफी ज्यादा होने के कारण चूहों तथा छिपकलियों के कारण रिकार्ड के नष्ट होने की संभावनाएं काफी ज्यादा बनी रहती हैं लेकिन रिकार्ड रूम में कार्यरत कर्मचारियों ने इस रिकार्ड को चूहों तथा छिपकलियों से बचाने के लिए एक अनूठा तरीका निकाला है। इस बेशकीमती रिकार्ड को नष्ट होने से बचाने के लिए यहां के कर्मचारियों द्वारा तीन बिल्लियां पाली गई हैं। यह बिल्लियां 24 घंटे यहां ड्यूटी देती हैं और रिकार्ड रूम में पैदा होने वाले चूहों व छिपकलियों को नियंत्रित करती हैं। पिछले दो वर्षों से यह बिल्लियां यहां ड्यूटी दे रही हैं। इसी के चलते रिकार्ड रूम में रखा रिकार्ड आज भी काफी अच्छी हालत में है।
बिल्ली को दूध पिलाता कर्मचारी।

बिल्लियों के लिए हर रोज खरीदा जाता है एक लीटर दूध

राजस्व विभाग के कार्यालय में कार्यरत कर्मचारियों द्वारा बिल्लियों पर होने वाला सारा खर्च अपनी जेब से किया जाता है। कर्मचारियों द्वारा बिल्लियों के लिए हर रोज एक लीटर दूध खरीदा जाता है। इस नामात्र के खर्च में राजस्व कार्यालय के कर्मचारियों द्वारा रिकार्ड रूम में रखे गए बेशकीमती रिकार्ड की सुरक्षा की जा रही है।

चूहों से करती हैं रिकार्ड की सुरक्षा

रिकार्ड रूम में रखे गए रिकार्ड को दिखाते कर्मचारी
राजस्व कार्यालय के रिकार्ड रूम में कार्यरत पटवार मोहरर सत्यवान, बस्ताबरदार सुखदेव शर्मा तथा जसबीर ने बताया कि पिछले दो वर्षों से वह इन बिल्लियों की देखरेख कर रहे हैं। बिल्लियां पूरी तरह से उनके साथ घुल मिल गई हैं और उनके सभी इशारों को अच्छी तरह से समझती हैं। उन्होंने बताया कि यह बिल्लियां एक सजग परहरी की तरह रिकार्ड की देखरेख करती हैं। इन बिल्लियों के कारण रिकार्ड रूम का पूरा रिकार्ड सही सलामत है। हालांकि चूहे पकडऩे के लिए तीन पिंजरे भी रखे गए हैं लेकिन बिल्लियों को यहां रखने के बाद पिंजरों की कोई जरूरत नहीं पड़ी है। उन्होंने बताया कि इस रिकार्ड रूम में जींद रियासत के समय का रिकार्ड रखा हुआ है।







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