प्रशासन सुस्त, शराब माफिया चुस्त


ग्रामीण क्षेत्रों में जमा चुके हैं जड़ें
नरेंद्र कुंडू
जींद।
जिले में शराब माफिया पूरी तरह बेकाबू हैं। शराब माफिया एक्साइज के नियमों को धत्ता बताकर विभाग को हर माह लाखों रुपए के राजस्व का चूना लगा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब की बिक्री धड़ल्ले से जारी है। बार-बार शिकायतें मिलने के बावजूद भी आबकारी विभाग व पुलिस प्रशासन शराब मफियाओं पर शिकंजा कसने में नाकामयाब हैं। विभाग अब तक 310 लोगों पर ही हाथ डाल पाया है और इनसे जुर्माने के तौर पर लगभग 12 लाख रुपए ही वसूले गए हैं। अगर विभाग सख्ती से कार्रवाई करने पर राजस्व का आंकड़ा इससे ज्यादा बढ़ सकता है। विभाग की सुस्ती से यह साफ होता है कि विभाग शराब माफियाओं के सामने पूरी तरह से नतमस्तक हो चुका है। इस प्रकार प्रशासन की सह में ही अवैध शराब का कारोबार फल-फुल रहा है। 
जिले में शराब माफियाओं ने पूरी तरह से अपना जाल फैला रखा है। अवैध शराब के इस कारोबार से अच्छी कमाई होने के कारण शराब माफियाओं का मोह इस धंसे से कम नहीं हो रहा है। शराब माफियाओं के निशाने पर सबसे ज्यादा ग्रामीण क्षेत्र रहते हैं। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्र में शराब माफियाओं के विश्वस्त सूत्र होते हैं, जो इनके इस काम को अंजाम देने में इनका पूरा सहयोग करते हैं। यहां पर शराब माफियाओं को पुलिसया कार्रवाई का डर भी कम होता है तथा पुलिस का शिकंजा कसे जाने पर यहां से बच निकलना भी आसान होता है। अगर विश्वस्त सूत्रों की मानें तो शराब माफियाओं के तार आबकारी व पुलिस विभाग से भी जुड़े होते हैं, जो रेड से पहले ही इनको सचेत कर देते हैं। जिस कारण शराब माफिया रेड से पहले ही अपना ठिकाना बदलकर आसानी से बच निकलते हैं। आंकड़ों पर नजर डाली जाए तो आबकारी विभाग अब तक सिर्फ 310 लोगों पर ही अपना शिकंजा कसने में कामयाब हो पाया है। विभाग द्वारा पकड़े गए लोगों से जुर्माने के तौर पर लगभग 12 लाख रुपए वसूले गए हैं। अगर आबकारी विभाग व पुलिस प्रशासन पूरी मुस्तैदी से काम करे तो यह आंकड़ा इससे कई गुणा बढ़ सकता है। विभाग को बार-बार शिकायतें मिलने के बाद भी विभाग द्वारा कोई सख्त कार्रवाई नहीं की जाती। जिस कारण शराब माफियाओं के हौंसले काफी बुलंद हैं। कभी-कभार अगर मामला ज्यादा तूल पकड़ता दिखाई दे या ग्रामीणों का दबाव प्रशासन पर बढ़े तो विभाग कार्रवाई के नाम पर खानापूर्ति कर देता है।
कानून के लचीलेपन के कारण भी शराब माफिया का मोह नहीं हो रहा कम
आबकारी एक्ट में शराब माफियाओं पर सख्त कार्रवाई का प्रावधान न होने के कारण भी शराब माफियाओं के हौंसले बुलंद रहते हैं। धंधा है पर गंदा है, लेकिन यह तो चंगा है की कहावत यहां स्टीक बैठती है। इस धंधे में आमदनी ज्यादा व जुर्माना नामात्र होने के कारण शराब माफियाओं का मोह इस धंधे से कम नहीं हो रहा है। आबकारी विभाग द्वारा अवैध शराब के साथ पकड़े जाने पर सजा का कोई प्रावधान नहीं है। विभाग शराब माफियाओं पर केवल जुर्माना लगा सकता है। विभाग जुर्माने के तौर पर पकड़े गए आरोपी पर बोतल के हिसाब से 50 से 500 रुपए का जुर्माना कर सकता है। लेकिन शराब माफिया पकड़े जाने पर विभाग के अधिकारियों के साथ सांठ-गांठ कर कम से कम जुर्माना अदा कर आसानी से बच निकलते हैं।
निडानी गांव में उठ चुका है कई बार विवाद
खेल गांव निडानी में पिछले कई सालों से अवैध शराब का कारोबार लगातार अपनी जड़ें फैला रहा है। गांव में अवैध शराब के बढ़ते कारोबार के कारण ग्रामीणों का कई बार शराब माफियाओं के साथ विवाद हो चुका है। गांव से अवैध खुर्द बंद करवाने की मांग को लेकर ग्रामीण कई बार जिला प्रशासन से भी गुहार लगा चुके हैं, लेकिन स्थिति वही जस की तस है। जिससे ग्रामीण आबकारी विभाग व पुलिस प्रशासन की भूमिका पर भी सवाल खड़े कर रहे हैं। गांव के सरपंच अशोक कमार, सुरेश पूनिया, रामेश्वर, शमशेर, कृष्ण, संजय, मनोज, नरेश ने बताया कि गांव में सरकार की तरफ से शराब का ठेका या सबबैंड अधिकृत नहीं किया गया है। गांव में शराब का ठेका या सबबैंड अधिकृत न होने के बावजूद भी गांव में शराब तस्करों द्वारा खुलेआम शराब बेची जाती है। ग्रामीणों ने बताया कि वे कई बार इसकी शिकायत आबकारी विभाग व पुलिस प्रशासन को कर चुके हैं। ग्रामीण सुरेश पूनिया ने बताया वे खुद भी दो बार 19-7-2011 व 21-12-11 को रजिस्ट्री के माध्यम से पुलिस अधीक्षक व उपायुक्त के नाम शिकायत भेज चुका हूं, लेकिन आज तक एक बार भी शराब तस्करों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि कई बार तो शराब ठेकेदार व अवैध रूप से खुर्दा चलाने वालों में अपनी-अपनी शराब की बिक्री को लेकर विवाद भी  हो जाता है। जिससे गांव का माहोल खराब हो रहा है।
शिकायत मिलने पर की जाती है कार्रवाई
विभाग को शिकायत मिलने पर तुरंत कार्रवाई की जाती है। इसके अलावा भी विभाग की टीमें रूटीन में छापेमारी करती है। पकड़े गए आरोपी से कानून के अनुसार कार्रवाई कर जुर्माना वसूला जाता है। पकड़े गए आरोपी के साथ किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाती है। लेकिन कई बार ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के सहयोग के कारण शराब विक्रेता बच कर   निकल जाते हैं। 
कृष्ण कुमार
इंस्पेक्टर उप आबकारी एवं कराधान, जींद

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विदेशों में भी मचा रहे हरियाणवी संस्कृति की धूम

किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बना ईगराह का मनबीर रेढ़ू

अब किसानों को कीट साक्षरता का पाठ पढ़ाएंगी खापें