आईसीपीएस से मिलेगा अनाथों को 'माँ-बाप' का प्यार

नरेंद्र कुंडू
जींद।
इंटीग्रेटीड चाइल्ड प्रोटैक्शन सोसायटी प्रदेश में अनाथ बच्चों का सहारा बनेगी। महिला एवं बाल विकास विभाग ने योजना को मूर्त रूप देने के लिए इंटीग्रेटीड चाइल्ड प्रोटैक्शन सोसायटी (आईसीपीएस) का गठन किया है। आईसीपीएस के सदस्य जिला स्तर पर सर्वे करेंगे तथा अनाथ व लावारिस बच्चों की पहचान कर उन्हें आश्रय देकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने का कार्य करेगें। आईसीपीएस अनाथ बच्चों की पहचान कर उनके लिए शिक्षा व सिर पर छत की व्यवस्था भी करेगी। विभाग द्वारा इस तरह के बच्चों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए इनको हर माह मिल रहे भत्ते में भी बढ़ोत्तरी करने के लिए विचार किया जा रहा है। अगर उच्च अधिकारियों की तरफ से भत्ते में बढ़ोत्तरी की मांग को हरी झंडी मिल गई तो इनका मासिक भत्ता 500 से बढ़कर 1500 रुपए प्रति माह भत्ता हो जाएगा। इसके अलावा आईसीपीएस के सदस्य बाल श्रम करवाने वालों पर भी पैनी नजर रखेंगे। इसके लिए विभाग ने एक हैल्पलाइन भी शुरू की है।
बेसहारा, अनाथ बच्चों को सहारा देने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक खास कवायद शुरू की है। बेसहारा बच्चों को सहारा देने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा आईसीपीएस का गठन किया गया है। निराश्रित, अनाथ बच्चे, जिनके माता-पिता दोनों की मृत्यु हो चुकी हो या उनको न्यायिक आदेशों के तहत मृत्यु दंड या आजीवन कारावास की सजा हो चुकी हो अथवा बच्चे के माता-पिता की मृत्यु के बाद बच्चे किसी रिश्तेदार के पास पल रहे हों तथा रिश्तेदार उनके अच्छा व्यवहार नहीं करता है, तो उनको इंटीग्रेटीड चाइल्ड प्रोटैक्शन सोसायटी सहारा देगी। आईसीपीएस अनाथ बच्चों के लिए शिक्षा की व्यवस्था तथा रहने के लिए छत का इंतजाम करेगी। ताकि बच्चे को पढ़ा-लिखा कर आत्म निर्भर बनाया जा सके। इसके अलावा आईसीपएस बाल श्रम को रोकने के लिए भी विशेष मुहिम चलाएगी। सोसायटी बाल मजदूरी करवाने वालों पर भी पैनी नजर रखेगी। इसके लिए सोसायटी ने शहर का सर्वे करवा कर दुकानों व ढाबों पर काम कर रहे बाल मजदूरों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है। जिला स्तर पर प्रोटैक्शन आफिसर व जिला चाइल्ड प्रोटैक्शन आफिसर की देखरेख में सोसायटी काम कर रही है। योजना को सफल बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने एक टीम का गठन किया है। इस टीम के सदस्य ब्लॉक अनुसार गांवों का दौरा कर बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक कर रहे हैं तथा अनाथ व लावारिश बच्चों की पहचान कर उनके लिए शिक्षा व रहने की व्यवस्था भी कर रहे हैं। इसके लिए  सदस्यों को इसके लिए बाकायदा विशेष ट्रेनिंग भी दी गई है। बेसहार व अनाथ बच्चों की सूचना देने के लिए सोसायटी द्वारा 1098 नंबर पर चाइल्ड हैल्प लाइन भी  शुरू की गई है। हैल्प लाइन के माध्यम से भी अनाथ व बेसहारा बच्चों की सूचना सोसायटी को दी जा सकती है। विभाग द्वारा इस तरह के बच्चों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के लिए इनको हर माह मिल रहे भत्ते में भी  बढ़ोत्तरी करने के लिए विचार किया जा रहा है। अगर उच्च अधिकारियों की तरफ से भत्ते में बढ़ोत्तरी की मांग को हरी झंडी मिल गई तो इनका मासिक भत्ता 500 से बढ़कर 1500 रुपए प्रति माह भत्ता हो जाएगा। इसके अलावा आईसीपीएस के सदस्य बाल श्रम करवाने वालों पर भी पैनी नजर रखेंगे।
 क्या कहती हैं अधिकारी
आईसीपीएस के सदस्य बच्चों को संरक्षण देकर उन्हें अत्याचारों से मुक्त करवाएंगे। बच्चों को उनके अधिकारों के प्रति जागरुक करने के लिए सोसायटी द्वारा गांवों में जाकर सेमिनारों का आयोजन भी किया जा रहा। इसके लिए सोसायटी के सभी सदस्यों को विशेष ट्रेनिंग दी गई है, ताकि विभाग द्वारा शुरू की गई इस योजना का लाभ अधिक से अधिक बच्चों को मिल सके। सोसायटी के सदस्यों के साथ-साथ प्रशासनिक अधिकारी भी सेमिनारों में भाग लेकर बच्चों को प्रेरित करेंगे। इस तरह के बच्चों को मिलने वाले मासिक भत्ते में भीबढ़ोतरी का विचार किया जा रहा है।
सरोज वर्मा
जिला चाइल्ड प्रोटैक्शन आफिसर 


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