अब शिक्षा विभाग बच्चों को देगा यात्रा शुल्क

जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों से मांगी विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की सूची

जींद। विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (अपाहिज) को पढ़ाई के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए शिक्षा विभाग ने खास योजना तैयार की है। इस योजना के तहत विभाग इन बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए यात्रा शुल्क अदा करेगा। विभाग द्वारा इन बच्चों को यात्रा शुल्क के तौर पर हर वर्ष तीन हजार रुपए दिए जाएंगे। विभाग द्वारा तैयार की गई इस योजना का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षित कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ना है। योजना को अमल में लाने के लिए विभाग के राज्य परियोजना निदेशक ने प्रदेश के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचान कर सूची तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। विभाग की इस योजना से जिले में 2015 बच्चे लाभावित होंगे। इसके अलावा विभाग द्वारा इन बच्चों को आत्मनिर्भर बनाने के लिए भी समर कैंपों का आयोजन भी किया जाता है।
 शिक्षा विभाग ने विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाई के प्रति प्रेरित करने के लिए कमर कस ली है। अब विभाग इन बच्चों को पैसे के अभाव के कारण पढ़ाई से मुहं नहीं मोड़ने देगा। इन बच्चों को पढ़ाई के लिए प्रेरित करने के लिए विभाग इन्हें आर्थिक सहायता प्रदान करेगा। विभाग की इस योजना के तहत इन बच्चों को स्कूल आने-जाने के लिए यात्रा शुल्क मुहैया करवाया जाएगा। विभाग द्वारा इन बच्चों को शुल्क के तौर पर हर वर्ष तीन हजार रुपए दिए जाएंगे। विभाग अपनी इस योजना के पीछे इन बच्चों को शिक्षा का अधिकारी दिलवाने तथा पढ़ा-लिखाकर समाज की मुख्य धारा से जोड़ने के सपने संजोए हुए है। विभाग की इस योजना से इन बच्चों को प्रोत्साहन तो मिलेगा ही, साथ-साथ इन बच्चों में शिक्षा प्राप्त कर अच्छा जीवन जीने की ललक भी पैदा होगी। योजना को अमल में लाने के लिए शिक्षा विभाग के राज्य परियोजना निदेशक ने प्रदेश के सभी जिला मौलिक शिक्षा अधिकारियों को पत्र लिखकर विशेष आवश्यकता वाले बच्चों की पहचानकर सूची तैयार करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। ताकि अधिक से अधिक बच्चे इस योजना का लाभ उठा सकें।

आत्म निर्भर बनाने के लिए दिया जा रहा है प्रशिक्षण

विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ आत्म निर्भर बनाने के लिए समर कैंपों का आयोजन किया जा रह है। इन कैंपों में बच्चों को जीवन जीने के सही तरीके तथा स्वरोजगार चलाने के लिए प्रशिक्षित किया जाता है। ताकि पढ़ाई के बाद रोजगार प्राप्त न होने की स्थिति में ये बच्चे हीन भावना का शिकार न होकर सही ढंग से अपना रोजगार चलाकर अपनी रोजी-रोटी कमा सकें।

समाज के साथ जोड़ना है मुख्य उद्देश्य

विभाग द्वारा शुरू की जाने वाली योजनाओं का मुख्य उद्देश्य विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को शिक्षित कर समाज की मुख्य धारा से जोड़ना है। बच्चों में किसी प्रकार की हीन भावना न पनपे इसलिए इन्हें आत्म निर्भर बनाने के लिए विभाग द्वारा समय-समय पर समर कैंपों का भी आयोजन किया जाता है।
वंदना गुप्ता
जिला शिक्षा अधिकारी, जींद


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

विदेशों में भी मचा रहे हरियाणवी संस्कृति की धूम

किसानों के लिए प्रेरणा स्त्रोत बना ईगराह का मनबीर रेढ़ू

अब किसानों को कीट साक्षरता का पाठ पढ़ाएंगी खापें